भारत की पोषण चुनौतियों पर राष्ट्रीय परिषद” की तीसरी बैठक को किया संबोधित
जनवक्ता डेस्क बिलासपुर
“स्वास्थ्य मंत्रालय ने अन्य मंत्रालयों के साथ मिलकर देश में पोषण की चुनौतियों से निपटने के लिए कई केंद्रित और लक्षित योजनाएं बनाई हैं। हमने टीकाकरण, पहचान और पूरक कार्यों पर पूरा ध्यान केंद्रित किया है।” ये बातें केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा ने महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका संजय गांधी की उपस्थिति में भारत की पोषण चुनौतियों पर राष्ट्रीय परिषद की तीसरी बैठक को संबोधित करते हुए कही। इस बैठक में नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार, नीति आयोग के स्वास्थ्य और पोषण विभाग में सदस्य डॉ. विनोद कुमार पॉल, महिला एवं बाल विकास सचिव राकेश श्रीवास्तव, स्वास्थ्य सचिव प्रीति सुदान, आयुष सचिव राजेश कोटेचा और अन्य मंत्रालयों जैसे पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के प्रतिनिधियों के साथ-साथ छत्तीसगढ़, तमिलनाडु एवं बिहार जैसे राज्यों के भी प्रतिनिधि उपस्थित थे। नड्डा ने आश्वस्त करते हुए कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय देश में पोषण की चुनौतियों का सक्रिय रूप से समाधान करेगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश में पोषण के व्यापक प्रसार को उच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि बच्चों के बीच पोषण की समस्या का निराकरण करने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने विभिन्न कार्यक्रम और योजनाएं चलाई हैं और आगे भी कई योजनाएं आने वाली हैं। मंत्रालय द्वारा किए गए पहल पर प्रकाश डालते हुए, नड्डा ने कहा कि पोषण अभियान के कार्यान्वयन में स्वास्थ्य मंत्रालय प्रमुख हितधारकों में से एक है। नड्डा ने कहा, “पोषण माह (सितंबर 2018) के दौरान, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एमओएचएफडब्ल्यू और स्वास्थ्य विभाग द्वारा 1.83 लाख गतिविधियों का आयोजन किया गया है, जिसमें करीब 2.58 करोड़ प्रतिभागियों ने भागीदारी निभाई है।” उन्होंने आगे कहा कि स्तनपान के प्रचार और समर्थन के लिए, सरकार ने स्तनपान को बढ़ावा और उचित स्तनपान को बेहतर बनाने के लिए “मां-मदरर्स-पूर्ण सहभाग” कार्यक्रम की शुरूआत की है। उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा कि स्तनपान के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए सभी समुदायों के साथ भागीदारी और सुविधा स्तर एवं 360 डिग्री आईईसी अभियान द्वारा स्तनपान प्रबंधन पर स्वास्थ्य श्रमिकों की क्षमता निर्माण पर अधिक जोर दिया गया है। नड्डा ने कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) और राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम जैसी योजनाओं के तहत क्रमशः बच्चों और किशोरों के बीच पोषण की कमी का पता लगाने के लिए कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकार वर्ष में दो बार राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस मनाती है और फरवरी से अब तक करीब 26.7 करोड़ बच्चों को अलबेंडाजॉल की खुराक दी गई है। नड्डा ने जोर देकर कहा कि इसमें स्थानीय नेताओं को शामिल करने और सरकार के पोषण पहल को और अधिक संवेदनशील बनाने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि वे लोगों के बीच जागरूकता बढ़ा सकें। इस बैठक में पिछली राष्ट्रीय परिषद की बैठक की सिफारिशों और पोषण माह के परिणामों पर संक्षिप्त विवरण, स्मार्ट फोन के विनिर्देशों और विकास निगरानी कार्यों, पोषण अभियान का तीसरे पक्ष द्वारा परिणाम आधारित मूल्यांकन, ई-आईएलए की भूमिका (ई- वृद्धिशील सीखने का दृष्टिकोण- प्रौद्योगिकी कार्यकर्ताओं को उनके ज्ञान और कौशल को निरंतर बढ़ाने के तरीके के आधार पर कार्य किया गया है) और पोषण अभियान के प्रभावी कार्यान्वयन से संबंधित कई अन्य मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

