इस विरोध प्रदर्शन में भारत के समस्त राज्यों के कर्मचारियों और अधिकारियों सम्मिलित हुए। ये विरोध प्रदर्शन सिर्फ न्यू पेंशन स्कीम के विरोध में हुआ। न्यू पेंशन स्कीम कोई पेंशन नहीं है। पुरानी पेंशन के मुकाबले। न्यू पेंशन स्कीम कर्मचारियों के साथ विश्वासघात है पेंशन स्कीम के नाम पर। हम सिर्फ समानता का अधिकार का चाहते हैं कि सभी भारतीय कर्मचारियों को पुरानी पेंशन मिले। राजिन्र्द स्वदेशी (राज्य मुख्य सलाहकार) एनपीएस कर्मचारी एसोसिएशन हिमाचल प्रदेश बाताया कि इसी संदर्भ में पूरे भारतवर्ष में अनेकों रैलियां, प्रदर्शन, हड़तालें हुई और सरकार के नुमाइंदों को न्यू पेंशन स्कीम के विरोध पत्र दिए गए और 30 अप्रैल 2018 को रामलीला मैदान दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर पर एक रैली हूई लेकिन केंद्र सरकार गहरी नींद में सोई रही। उसके बाद 28 अक्टूबर 2018 को भारत के समस्त सांसदों के घर भूख हड़ताल की गई लेकिन फिर भी केंद्र सरकार की तरह से कोई प्रतिक्रिया इस मुद्दे पर नहीं दी गई अर्थात शीतनिंद्रा में ही सोई रही। फिर 26 नवंबर 2018 को संसद घेराव हुआ है। उसमें भी भारत के लगभग 22 राज्यों के कर्मचारी और अधिकारियों ने भाग लिया परन्तु कोई भी सरकारी प्रतिक्रिया नहीं आई पुरानी पेंशन बहाली की मांग मांग पर। इसी कारणवश नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम एसोसिएशन को जन्तर-मन्तर पर पांच दिवसीय विरोध प्रदर्शन का आयोजन करना पड़ा कि केंद्र सरकार रिटायर कर्मचारियों के बुढ़ापे को मध्य नजर रखते हुए पुरानी पेंशन को पुनः बहाल करे ताकि रिटायर कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान हो सके और अपनी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने में भी सक्षम बन सके। नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम एसोसिएशन के अंतर्गत पांच दिवसीय धरना प्रदर्शन जन्तर-मन्तर के ऐतिहासिक स्थल पर किया गया। न्यू पेंशन धारक कर्मचारियों के द्वारा। न्यू पेंशन स्कीम के विरोध में : प्रोफेसर अनिल स्वदेशी (उपाध्यक्ष) एन एम ओपीएस दिल्ली ने बताया कि इस विरोध प्रदर्शन में भारत के लगभग सभी राज्यों के न्यू पेंशन स्कीम धारकों कर्मचारियों ने भागीदारी सुनिश्चित की। 28 जनवरी 2 019 से 1 फरवरी 2019 तक। प्रथम दिन के विरोध प्रदर्शन में प्रशासन ने दमनकारी नीति अपनाई प्रदर्शनकारियों को ओपन अरेस्ट करके राष्ट्रीय राजधानी के विभिन्न स्थानों पर छोड़ा गया। लेकिन प्रदर्शनकारियों के हौसले बुलंद होने के बावजूद बार-बार ऐतिहासिक स्थल जन्तर-मन्तर पर विरोध प्रदर्शन के लिए आते रहे और प्रशासन उनको ओपन अरेस्ट करके वहां से उठाता रहा। अन्त में सभी रामलीला मैदान की मुख्य सड़क के चौक पर प्रदर्शनकारियों ने एकत्रित होकर न्यू पेंशन स्कीम के विरोध में प्रदर्शन और नारेबाजी की शाम तक। 29 जनवरी, 30 जनवरी, 31 जनवरी और 1 फरवरी, 2019 को जन्तर-मन्तर के ऐतिहासिक स्थल पर ही न्यू पेंशन स्कीम का प्रदर्शनकारियों ने विरोध किया। 1 फरवरी शाम को विरोध के अन्तिम समय में प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्च करना उचित समझा क्योंकि इतने दिनों के विरोध प्रदर्शन के बाद भी प्रशासन की तरफ से कोई औपचारिक न्योता नहीं आया। जब प्रदर्शनकारियों ने ऐतिहासिक स्थल जन्तर-मन्तर से दमखम के साथ संसद मार्च शुरू किया तो प्रशासन ने उन्हें रोक दिया। और औपचारिक वार्ता के लिए बुलाया नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम एसोसिएशन के सदस्यों को। औपचारिक वार्ता के बाद पुरानी पेंशन बहाली पर कोई सकारात्मक नतीजा सामने नहीं आया। पांच दिवसीय न्यू पेंशन स्कीम विरोध प्रदर्शन शान्तिपूर्ण रहा। प्रोफेसर अनिल स्वदेशी (उपाध्यक्ष) एनएमओपीएस दिल्ली ने कहा कि भारत के समस्त न्यू पेंशन स्कीम धारकों की सिर्फ एक ही मांग है पुरानी पेंशन की बहाली। न्यू पेंशन स्कीम का पूर्ण विरोध अर्थात इसमें बदलाव हमें स्वीकार नहीं। सर्वोच्च न्यायालय ने भी पुरानी पेंशन को कर्मचारियों का अधिकार माना है अर्थात पुरानी पेंशन कोई भीख नहीं है। ये कर्मचारियों का संवैधानिक अधिकार है। केन्द्र सरकार रिटायर कर्मचारियों के बुढ़ापे को मध्य नजर रखते हुए हुए पुरानी पेंशन स्कीम को पुनः बहाल करे। ताकि रिटायर कर्मचारियों का बुढ़ापा सुरक्षित रहे।

