
जनवक्ता डेस्क, बिलासपुर
1 मई को जिला भर में राष्ट्रीय डिवर्मिंग दिवस मनाया जाएगा और इस दिन जिला के 1 वर्ष से 19 वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों व किशोरों को कृमि मुक्त करने के लिए समस्त शिक्षण संस्थानों और आंगनबाड़ी केन्द्रों में एल्बेंडाजोल दवाई खिलाई जाएगी। यह जानकारी उपायुक्त विवेक भाटिया ने राष्ट्रीय डिवर्मिंग दिवस के संदर्भ में जिला स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय डिवर्मिंग दिवस पर जिला के सभी स्वास्थ्य संस्थानों और 1 हजार 111 आंगनबाड़ी केन्द्रों के 1 लाख 6 हजार 968 बच्चों व किशोरों को एल्बेंडाजोल दवाई खिलाने के लिए चिन्हित किया गया है जिसके तहत 1 से 5 वर्ष तक की आयु के 22 हजार 227 तथा 6 से 19 वर्ष तक की आयु के 84 हजार 681 बच्चे शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 1से 5 वर्ष तक की आयु के बच्चों को एल्बेंडाजोल के साथ विटामिन ए भी दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जो बच्चे 1 मई को दवाई खाने से वंचित रह जाएंगे उन्हे 8 मई को दवाई दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर तक चलाए जा रहे इस अभियान की सफलता के लिए सम्बन्धित विभाग आपसी समन्वय स्थापित कर सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि बच्चों के पेट में कृमि संक्रमण के कारण शारीरिक और मानसिक विकास में बाधा पैदा हो जाती है जिससे वे खून की कमी और कुपोषण का शिकार हो जाते है। उन्होंने बताया कि पेट के कीड़े मारने के लिए कृमि नियंत्रण की दवाई लेने से जहां शरीर का पोषण बेहतर होता है वहीं बच्चे की रोग प्रतिशोधक क्षमता भी बढ़ती है। उन्होंने बताया कि बच्चों को यह दवाई शिक्षण संस्थानों के अध्यापकों व 5 वर्ष तक की आयु के बच्चों को यह दवाई आशा वर्करों की विशेष निगरानी में खिलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि पूर्ण तौर से सफाई की ओर ध्यान न देने के कारण बच्चों में पेट के कीड़े होने की ज्यादा संभावनाएं होती हैं। उन्होंने बताया कि कृमि बिना हाथ धोए खाना खाने, खुले में नंगे पांव खेलने से बच्चों के पेट में चले जाते हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि वे शिक्षण संस्थानों में नियमित रूप से जाकर बच्चों के स्वास्थ्य पर नजर रखें तथा बच्चों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग से भी कहा कि वह बच्चों में खून की कमी, कम वजन व कम हाईट वाले बच्चों को चिन्हित करें ताकि उन बच्चों पर विशेष ध्यान देकर उनके स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सके।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा0 प्रकाश दड़ोच ने कहा कि स्कूल जाने वाले बच्चों में पेट के कीड़े होने की संभावनाएं अधिक होती हैं। उन्होंने बताया कि इससे बच्चे खून की कमी के साथ-साथ डायरिया रोग से भी प्रभावित हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि इससे एहतियात बरतने के लिए तथा बच्चों को शिक्षित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें नियमित रूप से स्कूलों में जाकर स्वच्छता रखने के लिए प्रेरित कर रहीं हैं। इस अवसर पर एसडीएम प्रियंका वर्मा, शशिपाल शर्मा, उपनिदेशक उच्च शिक्षा अमर सिंह ठाकुर, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डा0 जय गोपाल शर्मा, एमओएच डा0 परविन्द्र सिंह के अतिरिक्त समस्त बीएमओ तथा सम्बन्धित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
