हल्द्वानी,। दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध की गूंज अब उत्तराखंड भी पहुंच गई है। उत्तराखंड के अलग अलग हिस्सों में छात्र इसका विरोध कर रहे हैं। हल्द्वानी के एमबीपीजी कॉलेज के छात्रों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की प्रतीकात्मक अर्थी निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। तिकोनिया चैराहे पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच तीखी नोकझोंक व धक्का-मुक्की भी हुई।
दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में हल्द्वानी में भी छात्र सड़कों पर उतर आए। एमबीपीजी कॉलेज से बड़ी संख्या में छात्रों ने विरोध मार्च निकाला। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की प्रतीकात्मक अर्थी लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए तिकोनिया चैराहे की ओर बढ़े। प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब पुलिस ने छात्रों को अर्थी के साथ आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया।
इस दौरान छात्रों और पुलिस के बीच तीखी बहस, धक्का-मुक्की और नोकझोंक देखने को मिली। पुलिस द्वारा अर्थी अपने कब्जे में लेने के बाद छात्रों का गुस्सा और बढ़ गया। मौके पर मौजूद छात्र सरकार और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ लगातार नारेबाजी करते रहे। हालात को देखते हुए प्रशासन ने तिकोनिया क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। पुलिस अधिकारियों ने छात्रों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। इसके बाद छात्र डीएम कार्यालय पहुंचे। जहां उन्होंने विरोध प्रदर्शन जारी रखा। उन्होंने दिल्ली की घटना की निष्पक्ष जांच कराने, छात्रों पर हुई कार्रवाई की निंदा करने तथा छात्र हितों की रक्षा की मांग उठाई।
वहीं, कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा बार-बार परीक्षाओं के पेपर लीक होना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। सरकार केवल जांच का आश्वासन देती है, लेकिन दोषियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने पारदर्शी और सुरक्षित परीक्षा प्रणाली की मांग की।सुमित हृदयेश ने कहा अब तक किसी बड़े जिम्मेदार अधिकारी या पूरे नेटवर्क के खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर प्रभावी रोक लग सके। उन्होंने कहा कि छोटी भर्ती परीक्षाओं से लेकर बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं तक पेपर लीक की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इससे युवाओं का परीक्षा प्रणाली और सरकार पर भरोसा कमजोर हो रहा है।
