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हनुमान की गर्जना से भयभीत हो गई लंकापुरी

Byjanadmin

Oct 16, 2018

रावण के पुत्र अक्षय कुमार और अन्य राक्षसों का वध करके अशोक वाटिका को उजाडा

हनुमान ने रावण को समझाया कि अभी भी सीता मैया को वापिस लौटा दे

बिलासपुर की ऐतिहासिक राम लीला की छठी संध्या में जिला टैंट एसोशिएशन के अध्यक्ष गंगा राम कैहल ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। समिति की ओर से उन्हें शाल व टोपी पहनाकर सम्मानित किया गया

जनवक्ता डेस्क बिलासपुर
साधू वेश धारण कर जब तूने पराई स्त्री को चुराया तो तुझे लज्जा नहीं आई, मैंने अपनी भूख मिटाने के लिए दो चार फल क्या खा लिए तो मैं दोषी हो गया। तूने राजाओं की मर्यादा को तोड़ा है रावण, साधुओं की जाति को कलंकित किया है …. बता लज्जा तूझे आनी चाहिए या मुझे …. जब यह संवाद रावण की भरी सभा में हनुमान जी ने कहे तो सारा पंडाल तालियों की गडगड़ाहट से गूंज उठा। नगर परिषद प्रांगण में चल रही उत्तरी भारत की ऐतिहासिक श्री राम नाटक मंचन की छठी संध्या में प्रभु राम की आज्ञा से माता जानकी की सुधी लाने के लिए वीर हनुमान लंका पहुंचते हैं जहां उन्हें रोती बिलखती माता सीता जी के दर्शन होते है। इस दौरान हनुमान ने रावण के पुत्र अक्षय कुमार और अन्य राक्षसों का वध करके अशोक वाटिका को उजाड़ देते हैं। अशोक वाटिका में मेघनाद ब्रम्हास्त्र का प्रयोग कर हनुमान जी को बंधक बनाकर रावण दरबार में प्रस्तुत करता है। हनुमान जी रावण को समझाते हैं कि रावण अभी तक कुछ नहीं बिगड़ा है, तुम सीता जी को सादर लौटा दो और लंका पर आए विनाश को टाल लो। लेकिन हठी और अभिमानी रावण हनुमान जी की किसी बात को नहीं सुनता है तथा उन्हें अपमानित कर उनकी पूंछ को आग लगाने का आदेश देता है।

जली पूंछ को लेकर हनुमान जी स्वर्ण लंका को आग लगा देते हैं। संध्या के अगले दृश्य में हनुमान जी वापिस श्री राम शिविर में पहुंच कर सारा वृतांत प्रभु राम को सुनाते हैं। काफी विचार विमर्श करने के बाद प्रभु राम युद्ध के लिए सुग्रीव और हनुमान को युद्ध संचालन का आदेश सुनाते हैं। इस दौरान लंका पार जाने के लिए समुद्र को सैन्य दल सहित लांघना श्री राम की सेना के लिए चुनौती का विषय बन जाता है। प्रभु राम पहले सागर राज से प्रार्थना करते हैं कि वे धर्म की रक्षा तथा जानकी के उद्धार के लिए लंका पर चढ़ाई करना चाहते हैं। लेकिन सग्रराज की ओर से कोई उत्तर न आने पर वे समुद्र को सुखाने के लिए अपना धनुष उठाते हैं। ऐसे में सग्रराज प्रकट होते हैं और प्रभु राम से अनुनय करते हैं कि भगवन यदि आप समुद्र को सुखा देंगे तो इसमें रहने वाले जलचरों का अस्तित्व मिट जाएगा। सग्रराज कहते हैं कि आप की सेना में नल और नील दो ऐसे वानर है जो कुछ भी यदि समुद्र में फैंकेंगे तो वह डूबेगा नहीं। इस दौरान राम का अभिनय नवीन सोनी, लक्ष्मण का रिशु शर्मा, सीता का कार्तिक शर्मा, हनुमान का राजेंद्र चंदेल, रावण का बृजेश कौशल, त्रिजटा का सुभाष भट्टा, सुग्रीव का गिरीश, महोदर शेर बहादुर, विभिषण रजत कुमार, मेघनाद का नितिन तांडी ने निभाया।

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