देहरादून,। वर्ष 2025 भारतीय बीमा क्षेत्र में कुछ ऐसे लैंडमार्क ग्राहक-केंद्रित सुधारों का साक्षी रहा, जो जीवन बीमा को सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा का मुख्य आधार बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाएंगे। इस वर्ष की शुरुआत श्सरेंडर वैल्यूश् नियमों में हुए सकारात्मक बदलावों से हुई, जिसके बाद जीएसटी छूट और बीमा सुगम पोर्टल की शुरुआत जैसे कदमों ने इस क्षेत्र के विकास पथ को और अधिक सुदृढ़ बनाया है। यह दृष्टिकोण कमलेश राव, चेयरपर्सन – इंश्योरेंस अवेयरनेस कमेटी (आईएसी-लाइफ) का है।
वर्तमान में जीवन बीमा की मांग मुख्य रूप से सुरक्षा, एन्यूटी और बचत उत्पादों के इर्द-गिर्द केंद्रित है। जैसे-जैसे भारतीय परिवार अपनी वित्तीय प्राथमिकताओं में सुरक्षा और रिटायरमेंट समाधानों को ऊपर रख रहे हैं, वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने में इन उत्पादों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होती जाएगी। इसी का परिणाम है कि वर्ष 2026 में हम बीमा कंपनियों द्वारा और भी सशक्त और नवोन्मेषी उत्पाद पेश किए जाने की उम्मीद कर सकते हैं। अगले वर्ष, एफडीआई नियमों में दी गई ढील के बाद भारतीय बाजार में अधिक अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के प्रवेश की प्रबल संभावना है। नए खिलाड़ियों के आने से उद्योग में आपसी तालमेल बढ़ेगा और जीवन बीमा समाधानों की पहुँच और दक्षता में सुधार होगा। अनुकूल नियामक परिवेश, डिजिटल तकनीक की बढ़ती रफ्तार और उपभोक्ताओं में बढ़ती जागरूकता के मेल से, 2026 में जीवन बीमा क्षेत्र में निरंतर और स्वस्थ विकास के एक नए दौर की शुरुआत होगी।