देहरादून,। उत्तराखंड में दूसरे राज्यों से हुए ट्रांसफर शस्त्र लाइसेंस जांच के लिए अब एसटीएफ सभी शस्त्र लाइसेंस की जांच में जुट गई है। एसटीएफ ने देहरादून जिलाधिकारी कार्यालय से 2015 के बाद से अब तक दूसरे राज्यों से ट्रांसफर होकर शस्त्र पंजिका में दर्ज होने के लिए आए शस्त्रों के लाइसेंस की सूची मंगाई है। सूची मिलने के बाद एसटीएफ सभी लाइसेंस की जांच करेगी। जो भी फर्जी लाइसेंस पाया जाएगा, उन शस्त्र मालिकों पर कार्रवाई भी की जाएगी।
बता दें कि इस प्रकरण में बीते शुक्रवार को जिस आरोपी मनोज को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है, वो देहरादून में रियल स्टेट बिजनेस करता था। उसने 2020 में मेरठ में दर्ज शस्त्र लाइसेंस ट्रांसफर करा कर देहरादून जिलाधिकारी कार्यालय की शस्त्र पंजिका में दर्ज कराया था। एसटीएफ के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी के लाइसेंस की जब जांच की गई, तो पता चला था कि यह लाइसेंस मेरठ में दर्ज था। जहां से इसे देहरादून ट्रांसफर किया गया। मेरठ में यह लाइसेंस सिरसा से फर्जी एनओसी के आधार पर ट्रांसफर होकर आया था। इसकी जांच करने पर इस बात की भी जानकारी मिली, कि सिरसा से इस तरह की कोई भी एनओसी जारी नहीं की गई, जिसके बाद मामले का खुलासा हुआ।
इसके साथ ही उत्तराखंड एसटीएफ ने 2015 के बाद से अब तक बाहरी राज्यों से स्थानांतरित होकर आए सभी शस्त्र लाइसेंस की जांच शुरू कर दी है। इसके लिए जिलाधिकारी कार्यालय से एक सूची भी मंगाई गई है। एसएसपी एसटीएफ नवनीत भुल्लर ने बताया है कि देहरादून में फर्जी शस्त्र लाइसेंस का मामला सामने आने के बाद देहरादून ही नहीं बल्कि अब उत्तराखंड के अन्य जिलों में भी बाहर से ट्रांसफर कराकर शस्त्र पंजिका में दर्ज होने वाले लाइसेंस की जांच की जा रही है। इसके लिए एसटीएफ की एक विशेष टीम को भी जिम्मेदारी दी गई है, जो सभी जिलों में बाहरी राज्यों से ट्रांसफर होकर आए लाइसेंसों की जांच करेगी। एसटीएफ एसएसपी नवनीत भुल्लर ने बताया कि साथ ही इस मामले में एसटीएफ पूरी गंभीरता से जांच कर रही है। देहरादून के साथ-साथ अन्य जिलों में भी बाहरी राज्यों से ट्रांसफर होकर आए शस्त्र लाइसेंस की सूची मंगाई जा रही। इस प्रकरण के संबंध में दूसरे राज्यों की कोई बात सामने आती है, तो वहां की स्थानीय एजेंसी से थी बात की जाएगी।
उत्तराखंड एसटीएफ द्वारा सामने आए फर्जी शस्त्र लाइसेंस का गिरोह दो राज्यों उत्तर प्रदेश और हरियाणा से जुड़ा हुआ है। इनमें हरियाणा के सिरसा से फर्जी लाइसेंस बनाया गया। उत्तर प्रदेश के मेरठ के लिए फर्जी तरीके से उसे ट्रांसफर कर दिया। मेरठ से ही एक अवैध हथियार लेकर उसे मेरठ के शस्त्र पंजीकरण में आसानी से दर्ज कर दिया गया। उसमें आरोपी की कई लोगों ने मदद की है, जिनकी फिलहाल एसटीएफ तलाश कर रही है। इस बात की जांच की जा रही है कि आरोपी के फर्जी शस्त्र लाइसेंस को दर्ज करने के लिए उसकी मदद किन लोगों ने की है।