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झड़ीपानी में होटल समेत कई भवनों को बेदखली का नोटिस

ByJanwaqta Live

Aug 2, 2026
देहरादून,। मसूरी के झड़ीपानी क्षेत्र में रेलवे की भूमि पर बने होटलों और अन्य भवनों पर अब बेदखली की तलवार लटक गई है। उत्तर रेलवे मुरादाबाद मंडल ने सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम 1971 के तहत कई संपत्तियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। माना जा रहा है कि नैनीताल हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद रेलवे प्रशासन अब अपनी जमीन पर सालों से चले आ रहे कथित अतिक्रमणों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के मूड में है।
रेलवे के संपदा अधिकारी की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि संबंधित भवन और होटल साल 2011 से रेलवे की भूमि पर कथित रूप से अनधिकृत कब्जे में हैं। ऐसे में अधिनियम की धारा 4 के तहत संबंधित पक्षों से पूछा गया है कि उनके खिलाफ बेदखली का आदेश क्यों न पारित किया जाए। नोटिस में साफ चेतावनी दी गई है कि यदि 7 दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब और आवश्यक दस्तावेज पेश नहीं किए गए, तो मामले में एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए बेदखली का आदेश जारी किया जा सकता है। इस पूरी कार्रवाई की सबसे अहम कड़ी नैनीताल हाईकोर्ट में लंबित वाद संख्या 2992-2023 है। बीती 16 जून 2026 को हाईकोर्ट की ओर से दिए गए निर्देशों के अनुपालन में रेलवे ने अपनी संपत्तियों का रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया है और जहां भी कथित अतिक्रमण सामने आ रहे हैं, वहां कानूनी प्रक्रिया के तहत नोटिस जारी किए जा रहे हैं। झड़ीपानी क्षेत्र में जारी इस कार्रवाई से होटल व्यवसायियों और भवन स्वामियों में हलचल मच गई है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा उनकी कानूनी जिम्मेदारी है। यदि कोई व्यक्ति या संस्था बिना वैध अनुमति रेलवे की भूमि का उपयोग कर रही है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करना आवश्यक है। अधिकारियों के मुताबिक, किसी भी कब्जाधारी को पहले अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाता है और उसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाता है। कानूनी विशेषज्ञों का भी मानना है कि सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम 1971 के तहत जारी नोटिस अंतिम आदेश नहीं होता, बल्कि यह संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान करता है। यदि कब्जाधारी वैध दस्तावेज या कानूनी अधिकार साबित नहीं कर पाते हैं, तो संपदा अधिकारी बेदखली का आदेश पारित कर सकते हैं।
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