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डीएसएन का मतलब डोंट से नो

Byjanadmin

Sep 30, 2018

घुमारवीं में तैयार हुई आर्ट आफ लिविंग की युवा वाहिनी

अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षिका डा.ऋचा चोपड़ा ने लिया कोर्स

बिलासपुर
बिलासपुर के घुमारवीं में आर्ट आफ लिविंग संस्था द्वारा प्रभावशली डीएसएन कोर्स का आयोजन किया गया जिसमें 80 युवा साधकों ने भाग लिया। इस कोर्स को अंतरराष्ट्रीय आर्ट आफ लिविंग प्रशिक्षिका डा.ऋचा चोपड़ा ने लिया। उन्होंने बताया कि डीएसएन का मतलब डोंट से नो यानि इस कोर्स को करने के बाद युवा रचनात्मक कार्यों की ओर अग्रसर होते हैं और किसी भी कठिन काम को करने में इतने सक्षम हो जाते हैं कि उनकी जुबान पर नहीं शब्द आता ही नहीं है। उन्होंने कहा कि रफ्तार से भागती जिंदगी में कभी किसी को एक पल रोककर पूछिए कि आखिर उसे चाहिए क्या? बहुतों का जवाब होगा, सुख। सुख की तलाश में सभी दिन-रात दौड़ लगा रहे हैं और सुख है कि मिलता नहीं। तो क्या करें? जिंदगी जीने और उसे देखने के तरीके में थोड़ी तब्दीली कर लें और इस काम में आपकी मदद को हमेशा तैयार है जिंदगी में महसूस होने वाले तमाम बंधनों को तोड़ने में मदद मिलती है। कोर्स करने के बाद आप अंदरूनी ताकत महसूस कर सकते हैं। कोर्स युवाओं में सामाजिक जिम्मेदारी स्वीकार करने का जज्बा पैदा करता है।
आर्ट आफ लिविंग बिलासपुर की मीडिया प्रभारी व प्रशिक्षिका रचना मेहता ने बताया कि जीवन जीने की कला तनाव घुटन एवं भय मुक्ति पाने का सुंदर और सरल साधन है। कार्यक्रम और इसका अभ्यास मन की गहराइयों में छिपी शक्ति का एहसास तो करवाता ही साथ ही उत्साह के खजाने का दरवाजा भी खोल देता है। उन्होंने बताया कि दिव्य समाज निर्माण शिविर के अंतिम दिन महा सत्संग का आयोजन किया गया, जिसमें काफी साधकों ने हिस्सा लिया। अंतिम दिन साधकों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि शिविर से कई गुणा कार्य शक्ति करने में बढ़ोतरी हुई साथ उत्साह बढ़ने से शांति का अनुभव हुआ। इस अवसर पर टीचर पंकज शर्मा व शेनशी भी मौजूद रही।

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