कार्यक्रम की अध्यक्षता शिशु रोग विशेषज्ञ डा. सतीश शर्मा ने की
प्रान्त कार्यवाह किस्मत कुमार कार्यक्रम के मुख्य वक्ता रहे
पथ संचलन में घुमारवीं विधायक राजेंद्र गर्ग, झंडूता विधायक जेआर कटवाल ने पूर्ण गणवेश में 5 किलोमीटर पैदल पथ संचलन कर भाग लिया
जनवक्ता डेस्क बिलासपुर
बिलासपुर में शुक्रवार को विजयदशमी के अवसर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपना 94वां स्थापना दिवस एवं शस्त्र पूजा कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता शिशु रोग विशेषज्ञ डा. सतीश शर्मा ने की। उन्होंने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि आज आरएसएस विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन बन चुका है । जिसके पीछे स्वयंसेवकों का त्याग व बलिदान जुड़ा है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयं सेवकों को समाज सेवा से जुडऩा चाहिए। व समाज को जागरूक करने में आगे आएं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रान्त कार्यवाह किस्मत कुमार कार्यक्रम के मुख्य वक्ता रहे। अपने संबोधन में आरएसएस के प्रांत कार्यवाह किस्मत कुमार ने कहा कि संघ व्यक्तियों में श्रेष्ठ गुणों का निर्माण करता है क्योंकि श्रेष्ठ नागरिक ही श्रेष्ठ समाज का निर्माण करते हैं।

उन्होंने कहा कि भगवान राम ने अपने जीवन आचरण से समस्त समाज को श्रेष्ठ जीवन पद्धति अपनाने की सीख दी व उच्च जीवन मूल्यों को स्थापित किया। महाविद्वान रावण को भी भारतीय समाज इसलिए खलनायक मानता है क्योंकि वह संस्कारविहीन था। उच्च जीवन मूल्य ही सनातन हिंदू परपंरा की धरोहर है लेकिन समय के साथ-साथ जाति भेद जैसी विषमताएं हिंदू समाज में व्याप्त हो गई हैं। इन विषमताओं को समाप्त करना होगा तभी भारत विश्व गुरु की पदवी पा सकता है। इस अवसर पर आरएसएस ने शहर में जिला स्तरीय पथ संचलन भी निकाला जिसमें करीब 1500 स्वयंसेवकों ने भाग लिया। यह पथ संचलन रौड़ा सैक्टर मैदान से आरंभ होकर गुरुद्वारा चौक, कालेज चौक व डियारा सैक्टर, बस अड्डा, गांधी मार्कीट होता हुआ फिर रौड़ा मैदान पहुंच कर ही समाप्त हुआ। इस पथ संचलन में घुमारवीं विधायक राजेंद्र गर्ग, झंडूता विधायक जेआर कटवाल ने पूर्ण गणवेश में 5 किलोमीटर पैदल पथ संचलन कर भाग लिया। कार्यक्रम में जिला संघ चालक इंदर डोगरा भी उपस्थित रहे।

इस कार्यक्रम में कई स्थानों से सूंदर झांकियां भी बनाई गई थी जिसमे भारत माता की सुरक्षा में खड़े स्वयंसेवक, ।
वाल्मीकि जी की झांकी सबका मन मोह रही थी



