युवाओं को अपनी लोक संस्कृति से जोड़ते हैं प्राचीन लोक वाद्य यंत्र
प्रतियोगिता में मांउट कार्मल स्कूल उना प्रथम स्थान पर रहा
जनवक्ता डेस्क बिलासपुर
आज के परिवेश में आवश्यकता है कि स्कूली शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों को संस्कार भी प्रदान किए जाएं। यह उद्गार हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला घुमारवीं में आयोजित राज्य स्तरीय बैंड प्रतियोगिता के उद्घाटन अवसर पर सम्बोधित करते हुए प्रकट किए। उन्होंने कहा कि शिक्षा जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अंग है और अविभावकों और अध्यापकों का दायित्व है कि वह विद्यार्थियों को गुणवत्तायुक्त और संस्कारित शिक्षा प्रदान करें। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में प्रतिभा की कमी नहीं है, आवश्यकता है कि अविभावक व अध्यापक इन प्रतिभाओं को तराशकर उनका उचित मार्गदर्शन करें।उन्होंने कहा कि प्रदेश में 18 हजार स्कूल व कालेज बेहतर शिक्षा प्रदान कर रहे है। उन्होंने बताया हमारे प्राचीन ऋषि मुनियों ने अपनी शिक्षा के बल पर ही बर्षों पूर्व निर्धारित कर दिया था कि वर्तमान समाज का स्वरूप कैसा होना चाहिए। उनहोंने कहा कि शिक्षा को प्रदान करने वाले गुरूओं का स्थान सबसे श्रेष्ठ है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बच्चों में अनुशासन और संस्कार प्रदान करने की अत्यंत आवश्यकता है । यद्यपि शिक्षा का विस्तार हुआ है लेकिन गुणवत्ता की कमी अभी भी खटकती है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को निशुल्क वर्दी, मध्यातंर भोजन व निपुण योग्य और प्रशिक्षित अध्यापकों की सेवाएं प्रदान करने के बावजूद भी अविभावक अपने बच्चों को प्राइ्रवेट स्कूलों में दाखिल करवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह एक अत्यंत चिन्तनीय विषय है। उन्होंने कहा कि सभी को मिलजुल कर इस विषय पर मंथन करने की आवश्यकता है कि विद्यार्थियों का रूझान निजी स्कूलों की ओर बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि मानव संसाधन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा राज्य में शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए अनेकों योजनाओं को कार्यरूप देने के लिए 500 सौ करोड़ रूपए उपलब्ध करवाए थे जबकि इस बर्ष 830 करोड रूपए की राशि प्रदेश में गुणात्मक शिक्षा को बढ़ाने पर व्यय किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नशे का प्रचलन बढ़ रहा है और भारत के युवाओं को नाकारा बनाने के लिए यह एक अन्तर्राष्ट्रीय षडयंत्र हैं उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को संस्कारयुक्त शिक्षा देने से नशे की आदत पर लगाम लगाई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वागींण विकास के लिए शिक्षा का जितना अधिक महत्व है उतना ही महत्तव अन्य स्पर्धात्मक गतिविधियों का भी है। स्पर्धात्मक गतिविधियों से न केवल विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम व एकता की भावना का उदय ही होता है अपितु समाज के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के प्रति प्रेरणा भी मिलती है। उन्होंने कहा कि इस की प्रतियोगिता को आयोजित करवाने का उद्ेश्य जहां विद्यार्थियों को अपनी प्राचीन लोक संास्कृतिक विरासत से अवगत करवाना है वहीं पश्चिमी संस्कृति की ओर बढ़ रहे युवाओं को अपनी लोक संस्कृति से जोड़ना भी है।
इस अवसर पर उन्होंने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला धुमारवीं को अपनी ओर से 51 हजार तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले विद्यार्थियों को 31 हजार रूपए देने की घोषणा की।
स्कूल प्रधानाचार्य ने मुख्यातिथि तथा अन्य अतिथियों का स्वागत किया।
इस प्रतियोगिता में प्रदेश के विभिन्न जिलो के 17 टीमों ने भाग लिया जिसमें 11 टीमें लड़कों की और 6 टीमें लड़कियों की रही। राज्य स्तरीय बैंड प्रतियोगिता में 262 विद्यार्थियों ने बैंड के माध्यम से विभिन्न धुनो को बजाकर अपनी कला दक्षता का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताओं के आयोजन से जहां भावी पीढ़ी प्राचीन लोक वाद्य यंत्रों से परिचित होती है वहीं विलुप्त होती प्राचीन लोक संस्कृति का संवर्धन व प्रचार-प्रसार भी होता है।
इस मौके पर डीपीओ कम प्रधानाचार्य डाईट अशोक शर्मा ने 51 सौ रूपए तथा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला घुमारवीं द्वारा 11 हजार मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए भेंट किए।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के ओएसडी महेन्द्र सिंह धर्माणी, एसडीएम घुमारवीं शशिपाल शर्मा, राज्य परियोजना निदेशक सम्रग शिक्षा अभियान आशीश कोहली, शिक्षा उपनिदेशक उच्च अमर सिंह ठाकुर, स्थानीय पाठशाला के प्रधानाचार्य जोगिन्द्र राव, डीएसपी घुमारवीं राजेन्द्र कुमार, डीपीओ कम प्रधानाचार्य डाईट अशोक शर्मा, राज्य समन्वयक रेणु, मंजुला, अनिमा, अनुराधा, जिला परिषद सदस्य पुरूषोतम शर्मा के अतिरिक्त स्कूल प्रबधन समिति के अध्यक्ष व सदस्य भी उपस्थित रहे।
प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार रहे। लड़कों के बैंड प्रतियोगिता में मांउट कार्मल स्कूल उना प्रथम जबकि रेनबों इंटरनेशनल नगरोटा बंगवा दूसरे स्थान पर और महावीर पब्लिक स्कूल मंडी तीसरे स्थान पर रहा। लड़कियों की प्रतियोगिता में मांउट कार्मल स्कूल उना प्रथम, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पोर्टमोर शिमला दूसरे स्थान पर तथा महावीर पब्लिक स्कूल मंडी तीसरे स्थान पर रहा।

