खुली निविदा प्रणाली में किसी को भी अवैध लाभ प्रदान नहीं किया गया
जनवक्ता ब्यूरो शिमला
हिमाचल पथ परिवहन निगम के एक प्रवक्ता ने आज यहां स्पष्ट किया है कि उच्च न्यायालय मुंबई और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के अधिवक्ता रघुनाथ बी. महाबल द्वारा की गई शिकायत तथ्यों के विपरीत है तथा खुली निविदा प्रणाली में किसी को भी अवैध लाभ प्रदान नहीं किया गया है।
प्रवक्ता ने कहा कि वाहनों की खरीद के लिए खुली निविदाओं को आमंत्रित किया गया था तथा इसका प्रिंट मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया था इसलिए शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप गलत तथा तथ्यों के विपरीत हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व के उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार इस निविदा की कीमतें भारत में सबसे कम हैं।
उन्होंने कहा कि पथ परिवहन निगम द्वारा पूर्व निविदाएं वर्ष पहले आमंत्रित की गई थीं तथा अपने पिछले अनुभव से सीख लेते हुए पथ परिवहन निगम ने इस निविदा में वार्षिक रख-रखाव अनुबंध (एएमसी) न रखने का निर्णय लिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि 12 सितम्बर, 2018 को जारी किए गए प्रस्ताव के लिए अनुरोध (आरएफपी) में कोई भी एएमसी प्रावधान नहीं रखे गए थे जैसा कि आरोप लगाया गया है।
प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि वाहनों की खरीद के लिए खुली व पारदर्शी निविदा प्रक्रिया अपनाई गई थी ताकि इन निविदाओं में अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित हो सके। प्री-बिड में 7 वाहन निर्माण कम्पनियों द्वारा भाग लिया गया था तथा निविदा में चार भारतीय वाहन विनिर्माण करने वाली कम्पनियां आई थी जो सभी पात्रता मानदंडों को पूरा कर रही थीं तथा ये भारत सरकार की एफएएमई योजना के तहत भी पंजीकृत है। वास्तव में निगम ने निविदा दस्तावेजों को तैयार करते समय यह सुनिश्चित किया था कि इसमे अधिकतम भागीदारी हो सके।
प्रवक्ता ने कहा कि किसी योग्यता मानदंड को किसी भी व्यक्ति के अनुरूप बनाने का आरोप आपत्तिजनक है क्योंकि किसी भी वाहन निर्माता को निविदा में भाग लेने से नहीं रोका गया था तथा निविदा में प्राप्त कीमत, भारत में सबसे कम हैं। उन्होंने कहा कि फाईनेशयल बिड खोलने के बाद कोई भी परिर्वतन नहीं किया गया है। निविदाएं पारदर्शिता तथा निविदा दस्तावेज के साथ नियमों व शर्तों के अनुसार बोलीदाताओं की उपस्थिति में खोली गई थीं। उन्होंने कहा कि निगम के सभी तकनीकी, परिचालन व वाणिज्यिक हित निविदा दस्तावेजों के अनुसार पूरी तरह से सुरक्षित हैं।

