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डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय का 34वां स्थापना दिवस आयोजित

Byjanadmin

Dec 1, 2018


जनवक्ता ब्यूरो सोलन
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने युवा कृषि वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि वे शून्य बजट प्राकृतिक खेती के विषय में खेतों में जाकर अनुसंधान करें ताकि प्राकृतिक कृषि के लाभ प्रदेश के सभी किसानों-बागवानों तक पहुंच सकें। राज्यपाल आज डॉ. यशवन्त सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी, सोलन के 34वें स्थापना दिवस के अवसर पर उपस्थित प्राध्यापकों एवं छात्रों को सम्बोधित कर रहे थे।
आचार्य देवव्रत ने इससे पूर्व विश्वविद्यालय में 2.50 करोड़ रुपये की लागत से 80 छात्राआें के लिए निर्मित गीतांजलि छात्रावास का लोकार्पण किया। उन्होंने सुभाष पालेकर कृषि अनुसंधान खण्ड का भ्रमण भी किया।
राज्यपाल ने इस अवसर पर डॉ. यशवंत सिंह परमार की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।
आचार्य देवव्रत ने कहा कि रासायनिक खाद के अत्यधिक प्रयोग के दुष्परिणाम अब सभी के सामने आ रहे हैं। कृषि विश्वविद्यालय हिसार तथा कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना के वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के अनुसार इन दोनों राज्यों में भू-जल स्तर प्रति वर्ष 4 फुट नीचे जा रहा है तथा भूमि का ऑरगैनिक कार्बन भी घट रहा है। उन्होंने कहा कि रासायनिक खाद के प्रयोग के मानव स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव भी स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर हो रहे हैं।
राज्यपाल ने कहा कि भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए रखने, मनुष्य तथा पशु-पक्षियों को रसायनिक खाद के दुष्प्रभावों से बचाने तथा शून्य लागत में कृषकों की आय बढ़ाने के लिए वृहद स्तर पर शून्य लागत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती पर्यावरण संरक्षण एवं भू-जल को रिचार्ज करने में भी सहायक है।
उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि देश एवं क्षेत्र विशेष के परम्परागत बीज को अनुसंधान के माध्यम से जीवित रखें तथा इसकी उत्पादक क्षमता बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि इस दिशा में नौणी स्थित यह विश्वविद्यालय विशेष प्रयास कर सकता है।
आचार्य देवव्रत ने प्रदेश के किसानों-बागवानों से आग्रह किया कि वे हिमाचल की भूमि के अनुरूप अधिक मात्रा में फलों एवं सब्जियों का उत्पादन करें तथा पुष्पोत्पादन को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों को इस दिशा में अधिक अनुसंधान करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों को आधुनिक तकनीक एवं अनुसंधान को खेत तक पहुंचाने की दिशा में भी कार्य करना चाहिए।
राज्यपाल ने अध्यापकों तथा छात्रों से आग्रह किया कि वे विश्वविद्यालय को कृषि एवं बागवानी अनुसंधान का आदर्श बनाएं ताकि यहां किए गए अनुसंधान से पूरा देश लाभान्वित हो।
उन्होंने विश्वविद्यालय के 34वें स्थापना दिवस के अवसर पर अध्यापकों एवं छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए आशा जताई कि विश्वविद्यालय विषय की आवश्यकताओं के अनुरूप प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में तर्कसंगत कार्य करेगा।
आचार्य देवव्रत ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपतियों डॉ. एस.एस. नेगी, डॉ. आर.पी. अवस्थी, डॉ. जगमोहन सिंह, डॉ. के.आर. धीमान तथा डॉ. विजय सिंह ठाकुर को सम्मानित किया।
उन्होंने विश्वविद्यालय के मेधावी छात्रों तथा विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को भी सम्मानित किया। उन्होंने प्रगतिशील किसानों को भी सम्मानित किया।
आचार्य देवव्रत ने इस अवसर पर डॉ. एस.के. गुप्ता द्वारा लिखित पुस्तक ‘डिज़ीज प्रॉब्लम्स इन वेजिटेबल प्रोडक्शन’ तथा डॉ. ऐ.के. नाथ द्वारा लिखित पुस्तक ‘ऑब्जेक्टिव बॉयोकेमिस्ट्री एण्ड बॉयो टैक्नोलॉजी’ का विमोचन भी किया।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एच.सी. शर्मा ने मुख्यातिथि का स्वागत किया तथा विश्वविद्यालय की गतिविधियों से उन्हें अवगत करवाया।
उपायुक्त सोलन विनोद कुमार, पुलिस अधीक्षक मधुसूदन शर्मा, विश्वविद्यालय के कुलसचिव राजेश मारिया, प्राध्यापक, छात्र तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।

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