
जनवक्ता डेस्क, बिलासपुर
प्रयाग कुम्भ अन्य कुम्भों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रकाश की ओर ले जाता है। यह ऐसा स्थान है जहां बुद्धिमत्ता का प्रतीक सूर्य का उदय होता है। इस स्थान को ब्रह्माण्ड का उद्गम और पृथ्वी का केंद्र माना जाता है। यह बात केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नडडा ने प्रयागराज में कुम्भ स्नान के उपरांत अनौपचारिक बात करते हुए कही। उन्होंने बताया कि ऐसी मान्यता है कि ब्रह्माण्ड की रचना से पहले ब्रम्हाजी ने यहीं अश्वमेघ यज्ञ किया था। दश्वमेघ घाट और ब्रम्हेश्वर मंदिर इस यज्ञ के प्रतीक स्वरुप अभी भी यहां मौजूद हैं। इस यज्ञ के कारण भी कुम्भ का विशेष महत्व है। यानि कहा जा सकता है कि कुम्भ और प्रयाग एक 12 वर्षो के बाद गंगा, यमुना एवं सरस्वती के संगम पर आयोजित किया जाता है। हरिद्वार में कुम्भ गंगा के तट पर और नासिक में गोदावरी के तट पर आयोजित किया जाता है। इस अवसर पर नदियों के किनारे भव्य मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें बड़ी संख्या में तीर्थ यात्री आते हैं। उन्होंने बताया कि योगी सरकार ने इस बार बतयंत ही बेहतर प्रबंध किए थे जिससे आज तक सभी ने बिना किसी व्यवधान के स्नान किया है। उन्होंने कहा कि कुम्भ महोत्सव पौष मास की पूर्णिमा से प्रारंभ होता है। कुम्भ महोत्सव प्रत्येक चौथे वर्ष नासिक, इलाहाबाद, उज्जैन, और हरिद्वार में बारी-बारी से मनाया जाता है।
