न्याय पाने के लिए हाईकोर्ट का द्वार खटखटाने को हुए विवश
जनवक्ता डेस्क, बिलासपुर
सर्वदलीय भाखड़ा विस्थापित समिति ने इस बात पर रोष व्यक्त किया है कि पिछले विधान सभा चुनाव से पहले तब संभावित मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष प्रोफेसर प्रेमकुमार धूमल और भाजपा के अन्य शीर्ष नेताओं की घोषणा और स्पष्ट आश्वासनों के बिलकुल विपरीत हिमाचल प्रदेश में सत्ता में आई भाजपा के जयराम ठाकुर सरकार ने भाखड़ा विस्थापितों की वर्षों से निरंतर चली आ रही समस्याओं को सुलझाने की बजाए उन्हें उलझाने का रेवया अपनाया जबकि 20 वर्षों से हिमाचल के अन्य सभी शहरों में लागू कर दिये जाने के बावजूद भी बिलासपुर नगर के भाखड़ा विस्थापित नगर होने के कारण इसे यहाँ नहीं लगाया गया था , किन्तु जयराम ठाकुर सरकार ने सत्ता में आते ही भाखड़ा विस्थापितों पर भी गृह कर थोंप कर उनकी समस्याओं को बढ़ाने में कोई कोर कसर शेष नहीं छोड़ी |
पिछली शाम नगर में आयोजित समिति की बैठक के सर्वसम्मत प्रस्ताओं की प्रतियाँ प्रसारित करते हुए समिति के महामंत्री जयकुमार ने कहा कि जयराम ठाकुर सरकार के प्रथम एक वर्ष के कार्यकाल में ही जिले के तीनों भाजपा विधायकों के साथ और फिर दो बार बिलासपुर सदर के विधायक सुभाष ठाकुर के साथ मुख्यमंत्री से मिल कर विस्थापितों के समस्याओं पर समिति द्वारा बार बार चर्चा करने और मुख्यमंत्री द्वारा दिये गए आश्वासनों के बावजूद भी उनकी कठिनाइयों और समयसाओं को सुलझाने की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया | बल्कि उल्टे उनकी समस्याओं को उलझाने और कठिनाइयाँ पैदा करने के नकारात्मक प्रयास किए गए |
समिति ने कहा कि जयराम ठाकुर की सरकार के प्रथम विधान सभा सत्र में विस्थापितों की समस्याओं पर वरिष्ठ कांग्रेस विधायक रामलाल ठाकुर द्वारा चर्चा में उठाए जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ,विरोध पक्षीय नेता मुकेश अग्निहोत्री और बिलासपुर जिले के तीनों भाजपा विधायकों तथा स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा विस्थापितों के प्रति सहानूभूति प्रदर्शित करके
उनकी समस्याएँ सुलझाने का सारी विधान सभा द्वारा मुख्यमंत्री के नेत्रत्व में प्रस्ताव पारित किए जाने के बावजूद भी अब नई सरकार का डेढ़ वर्ष बीत जाने पर भी कोई भी सकारात्म्क परिणाम नहीं निकला है | अब सरकार के इस ब्यवहार से निराश – हताश होकर विस्थापितों को विवश होकर हिमाचल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा है |
समिति ने सर्वसम्मत प्रस्ताव में आश्चर्य व्यक्त किया कि विधान सभा में सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित करने और विस्थापितों के समस्याएँ तुरंत प्रभाव से सुलझाने का आश्वासन दिये जाने के बाद भी जयराम ठाकुर सरकार ने उन पर कोई अमल नहीं किया | उल्टे बिलासपुर नगर में इतिहास में प्रथम बार गृह कर न देने की अवस्था में नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी द्वारा 18 प्रतिशत पेनलटी लगाने , बिजली –पानी के कुनेशन काटने और टेक्स न चुकाने पर उनके घरों तक की नीलामी करने की धमकियाँ दी गई |
समिति ने सर्वसम्मत प्रस्ताव में कहा कि उनके सरकारी भूमि के अतिक्रमण और सरकार द्वारा थोपे गए गृह कर के विषय पर हाई कोर्ट जो भी निर्णय देगा , भाखड़ा विस्थापित उसको अक्षरश्या लागू करेंगे ,किन्तु समिति ने दुख व्यक्त किया कि उन्हें न्याय देने के इस सुअवसर का जयराम ठाकुर सरकार ने कोई लाभ नहीं उठाया |हालांकि इस संदर्भ में हाईकोर्ट के डबल बेंच में जस्टिस कुरियन जोशेफ ने विस्थापितों द्वारा भाखड़ा बांध के निर्माण के लिए अपना सब कुछ बलिदान करने के कारण उपयुक्त नीति बना कर उन्हें राहत पहुंचाने के स्पष्ट आदेश दिए थे | बैठक में अन्यों के अतिरिक्त डाक्टर एन के सांख्यान , जे के नड्डा , ओमप्रकाश मेहता, अमृत लाल नड्डा , रामसिंह , अमरसिंह , नन्द लाल कोंडल , प्रताप सिंह भल्ला , रशीद अहमद , राशिम महाजन , मनोज कुमार , पुरुषोतम शर्मा , ओ पी गर्ग ,ओंकार कौशल , राज कुमार टाड़ू, डाकटर उपेंद्र गौतम ,अशोक सैनी , अमरजीत पँवार , कुलदीप सिंह ,लेखराम , देवी राम वर्मा , रामपाल डोगरा , जगदीश कोंडल , कांशी राम चौधरी , महेंद्र कुमार शर्मा , कृष्णा चौहान , कमलेन्द्र कश्यप , सुखराम , राजेन्द्र शर्मा , देश राज जंवाल , कृशन लाल , एस एल कालिया , लोकनाथ और भूपेन्द्र सिंह आदि ने भाग लिया।

