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ज्यादा कोल्ड ड्रिंक पीने से डैमेज हो सकती है किडनी, महिलाओं के लिए है जहर समान

ByJanwaqta Live

Apr 10, 2020

Health: आमतौर पर ज्यादातर लोग सोडा पीने के बहुत शौकीन होते हैं। यह अलग-अलग रंग और फ्लेवर में बिकता है जो लोगों को काफी आकर्षित करता है। जहां कुछ लोग स्नैक के साथ सोडे की चुस्की लेते हैं तो कुछ लोग मार्केट जाने पर सोडा पीने से खुद को रोक नहीं पाते हैं। गर्मी के मौसम में सोडे की मांग अधिक होती है। लेकिन आप जिस फिजी ड्रिंक को पी रहे हैं उससे आपके शरीर को कुछ देर के लिए ठंडक जरूर मिलती है लेकिन सोडा आपकी सेहत पर खराब असर डाल सकता है। अध्ययनों से पता चलता है कि सोडा विशेष रूप से हमारी किडनी को अधिक प्रभावित करता है जो चिंता का मुख्य कारण है।
किडनी स्टोन
सोडा कार्बोनेटेड वाटर, शुगर, फ्रक्टोज कॉर्न सिरप और रसायनों का मिश्रण है। इसके अलावा सोडे में फॉस्फोरिक एसिड की अधिक मात्रा होती है जिसके कारण यूरिन परिवर्तित हो जाता है और किडनी स्टोन का जोखिम बढ़ जाता है। एक स्टडी के अनुसार, नॉन-कोला सोडा ड्रिंकर्स में किडनी स्टोन की संभावना 33 प्रतिशत होती है जबकि कोला पीने वाले में नॉन-कोला ड्रिंकर्स की अपेक्षा पथरी का जोखिम 23 प्रतिशत अधिक होता है।
किडनी डिजीज
सोडा पीने से किडनी रोग भी होता है जिससे किडनी धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती है और अंतत: फेल हो जाती है। एक अध्ययन के अनुसार हर दिन दो या इससे अधिक कोला का सेवन करने से क्रोनिक किडनी डिजीज हो सकता है।
महिलाओं में किडनी फंक्शन पर पड़ता है असर
अध्ययन से पता चलता है कि सोडा में पाये जाने वाले कृत्रिम मिठास के कारण महिलाओं में सबसे अधिक किडनी से जुड़ी बीमारियां होती हैं। हालांकि सोडा को कम कैलोरी और शुगर रहित माना जाता है। लेकिन सोडे की कृत्रिम मिठास के कारण महिलाओं में किडनी डिसफंक्शन की समस्या हो सकती है।
रिनल डिसफंक्शन
सोडे में फॉस्फोरस पाया जाता है। लंबे समय तक अधिक मात्रा में सोडा का सेवन करने से किडनी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और रिनल डिसफंक्शन की संभावना बढ़ जाती है।
सोडे की कितनी मात्रा किडनी को प्रभावित करती है?
रोजाना दो या इससे अधिक कम कैलोरी युक्त कृत्रिम मिठास वाला सोडा पीने से महिलाओं में किडनी फंक्शन कम होने का जोखिम दो गुना बढ़ जाता है।
कैसा सोडा पीना सुरक्षित है?
सोडा में कृत्रिम मिठास और अधिक मात्रा में फॉस्फोरस पाया जाता है जो सेहत के लिए फायदेमंद नहीं होता है इसलिए इसका सेवन करने से बचना चाहिए। नींबू और लाइम फ्लेवर के हल्के रंग के सोडे में अधिक फॉस्फोरस नहीं होता है इसलिए इनका सेवन किया जा सकता है। फ्रूट पंच और कोला में पोटैशियम की मात्रा अधिक होता है जिससे बचना चाहिए।
अगर आप भी कोला या सोडा पीने के शौकीन हैं तो किडनी से जुड़े रोगों से बचने के लिए इसका सेवन बंद कर दें या फिर सीमित मात्रा में सोडा का सेवन करें।
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