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अखिलेश के बयान पर उत्तराखंड कांग्रेस की चुप्पी क्यों? गठबंधन के दबाव में प्रदेश का सम्मान गिरवी

ByJanwaqta Live

Oct 26, 2026

देहरादून,। नैनीताल-उधमसिंह नगर के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय भट्ट ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी और उनके राजनीतिक गठबंधन के साथी अखिलेश यादव के बीच उत्तराखंड के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले बयान देने की होड़ लगी है। एक ओर राहुल गांधी देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को ‘विलेन’ बताकर देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले व्यक्तित्व पर राजनीतिक हमला करते हैं, तो दूसरी ओर अखिलेश यादव उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया बताकर पूरे देवभूमि की जनता का अपमान करते हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगियों की राजनीति अब देश के सम्मानित व्यक्तित्वों और उत्तराखंड की अस्मिता पर हमला करने तक सिमट गई है।
श्री भट्ट ने कहा कि राहुल गांधी को देश की सुरक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के योगदान को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय देशहित को समझना चाहिए। वहीं अखिलेश यादव को यह समझना होगा कि उत्तराखंड के लोग किसी राजनीतिक दल की कृपा से नहीं, बल्कि अपनी मेहनत, प्रतिभा, राष्ट्रसेवा और बलिदान के दम पर देशभर में सम्मान अर्जित करते हैं। जिस देवभूमि के वीर सपूत देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं, उसी प्रदेश के लोगों को घुसपैठिया बताना अखिलेश यादव की गैर-जिम्मेदाराना राजनीति और उत्तराखंड के प्रति उनके असम्मान को उजागर करता है।
सांसद श्री भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड के लोग वर्ष 1994 के राज्य आंदोलन के जख्म आज भी नहीं भूले हैं। मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार के कार्यकाल में अलग राज्य की मांग कर रहे आंदोलनकारियों पर पुलिस गोलीबारी हुई थी। रामपुर तिराहा की घटना उत्तराखंड के इतिहास का काला अध्याय है। उस समय उत्तराखंड के लोग अपने अधिकार और पहचान के लिए संघर्ष कर रहे थे, लेकिन उन्हें दमन का सामना करना पड़ा। आज उसी राजनीतिक परिवार के उत्तराधिकारी अखिलेश यादव उत्तराखंडवासियों को घुसपैठिया बताकर उनके स्वाभिमान पर चोट कर रहे हैं। पिता के शासनकाल में आंदोलनकारियों पर हुए दमन की पीड़ा उत्तराखंड भूला नहीं है और अब बेटे की बयानबाजी भी प्रदेश की जनता बर्दाश्त नहीं करेगी।
श्री भट्ट ने उत्तराखंड कांग्रेस के नेताओं पर भी सीधा हमला बोलते हुए कहा कि अखिलेश यादव कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी के राजनीतिक सहयोगी हैं, लेकिन जब यही सहयोगी उत्तराखंड के लोगों का अपमान करता है, तब प्रदेश के कांग्रेसी नेताओं की जुबान पर ताला क्यों लग जाता है? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इन नेताओं में अखिलेश यादव के बयान की निंदा करने का साहस नहीं है? क्या गठबंधन की राजनीति में कांग्रेस ने उत्तराखंड का सम्मान भी अपने सहयोगियों के हाथों गिरवी रख दिया है?
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड कांग्रेस के नेताओं को दोहरा चरित्र छोड़कर स्पष्ट करना चाहिए कि वे देवभूमि के लोगों के साथ खड़े हैं या अपने राजनीतिक गठबंधन के दबाव में अपमान सहने को तैयार हैं। जब अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ बोलने की बारी आती है तो कांग्रेस नेता खूब बयानबाजी करते हैं, लेकिन जब उनके गठबंधन का नेता उत्तराखंडवासियों को अपमानित करता है, तब सबकी आवाज बंद हो जाती है। यह चुप्पी उनकी राजनीतिक मजबूरी और कथनी-करनी के अंतर को उजागर करती है।
श्री भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड कोई ऐसा प्रदेश नहीं है, जिसके लोगों को कोई भी नेता उठकर अपमानित कर दे और यहां के राजनीतिक दल चुपचाप तमाशा देखते रहें। देवभूमि के लोगों ने अपने संघर्ष से अलग राज्य हासिल किया है और अपने बलिदान से देश में विशिष्ट पहचान बनाई है। उत्तराखंड के सैनिकों, युवाओं, मेहनतकश लोगों और राज्य आंदोलनकारियों का अपमान किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को उत्तराखंड की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए और कांग्रेस नेतृत्व को अपने सहयोगी के बयान पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। उत्तराखंड कांग्रेस के नेताओं को भी अपनी चुप्पी तोड़कर बताना चाहिए कि क्या उनके लिए प्रदेश का सम्मान सर्वोपरि है या गठबंधन की राजनीति। देवभूमि का अपमान करके कोई नेता अपनी राजनीति नहीं चमका सकता। उत्तराखंड के स्वाभिमान पर चोट करने वालों को जनता के आक्रोश और लोकतांत्रिक जवाब का सामना करना पड़ेगा।

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