देहरादून,। कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चैधरी ने कांग्रेस की न्याय यात्रा पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तराखंड की जनता के साथ अन्याय करने वाली कांग्रेस आज न्याय यात्रा के नाम पर घड़ियाली आंसू बहा रही है। जिस पार्टी के पास प्रदेश की जनता के सवालों का जवाब नहीं, विकास का ठोस विजन नहीं और जनसमस्याओं के समाधान की स्पष्ट कार्ययोजना नहीं, वह आज न्याय की बात कर रही है। गैरसैंण में विधानसभा घेराव और राजनीतिक यात्राओं से कांग्रेस अपने शासनकाल की जवाबदेही से बच नहीं सकती। उत्तराखंड की जनता को कांग्रेस की राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि अपने सवालों के जवाब और समस्याओं का ठोस समाधान चाहिए।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि वर्ष 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में उत्तराखंड की पांचों सीटों पर भाजपा की जीत और 2017 व 2022 के विधानसभा चुनावों में मिला जनसमर्थन जनता के विश्वास को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विकास और जनकल्याण के लिए निरंतर काम कर रही है। कांग्रेस को पहले अपने शासनकाल का हिसाब देना चाहिए। वह बताए कि उसने प्रदेश के विकास, रोजगार और जनसमस्याओं के समाधान के लिए क्या किया। जनता के बीच जाने से पहले कांग्रेस को अपने काम का रिपोर्ट कार्ड पेश करना चाहिए, क्योंकि केवल नारे लगाने और आरोप लगाने से जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता।
श्री चैधरी ने कहा कि अंकिता भंडारी प्रकरण उत्तराखंड की जनता की भावनाओं से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है। इस मामले में तीन आरोपियों को अदालत से उम्रकैद की सजा मिल चुकी है और कथित वीआईपी की भूमिका से जुड़े पहलू पर सीबीआई जांच कर रही है। अंकिता को न्याय मिलना सर्वोपरि है और जांच निष्पक्ष रूप से आगे बढ़नी चाहिए। कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि इस मामले में उसके पास कौन-से ठोस तथ्य और विशिष्ट सवाल हैं। यदि उसके पास कोई तथ्य हैं, तो उन्हें संबंधित जांच एजेंसी के समक्ष रखना चाहिए। संवेदनशील प्रकरण को राजनीतिक आरोपों तक सीमित करना और न्याय के नाम पर जनता की भावनाओं का राजनीतिक इस्तेमाल करना उचित नहीं है। न्याय की मांग के साथ निष्पक्ष जांच और कानून की प्रक्रिया का सम्मान भी आवश्यक है।
रोजगार के मुद्दे पर श्री चैधरी ने कहा कि कांग्रेस युवाओं के भविष्य की चिंता जताने का दिखावा करने के बजाय प्रदेश की वास्तविक स्थिति और अपने शासनकाल का हिसाब दे। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी के नेतृत्व में प्रदेश में साढ़े चार वर्ष के कार्यकाल में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। इसके अतिरिक्त, अक्टूबर 2026 में मुख्यमंत्री जी ने बताया कि राज्य में 29 हजार से अधिक नई एमएसएमई इकाइयों के माध्यम से लगभग 1.27 लाख युवाओं को रोजगार मिला है। ये प्रयास रोजगार सृजन और युवाओं को अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। कांग्रेस बताए कि उसने अपने शासनकाल में युवाओं के लिए क्या किया और आज रोजगार बढ़ाने के लिए उसके पास कौन-सी ठोस योजना है। युवाओं के नाम पर राजनीति करना आसान है, लेकिन उनके भविष्य के लिए काम करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पलायन उत्तराखंड की पुरानी और गंभीर चुनौती है, जिसके समाधान के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, स्वरोजगार बढ़ाना और स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना आवश्यक है। ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के अनुसार, वर्ष 2020 से अब तक लगभग 6,282 लोग अपने गांवों में लौटे हैं। यह रिवर्स पलायन को प्रोत्साहित करने के प्रयासों का एक संकेत है, हालांकि इस चुनौती का पूर्ण समाधान अभी बाकी है। सरकार गांवों में आजीविका के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। कांग्रेस को बताना चाहिए कि उसके शासनकाल में पहाड़ के गांवों से पलायन रोकने और स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए। आज पहाड़ की चिंता जताने वाली कांग्रेस अपने पुराने कार्यकाल का जवाब देने से क्यों बचती है?
श्री चैधरी ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं, कथित भ्रष्टाचार, जमीन के सौदों और अवैध खनन जैसे मुद्दों पर कांग्रेस को प्रमाणों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए। जहां अनियमितता के प्रमाण हों, वहां निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। महिला सुरक्षा के मामलों में पीड़ितों को न्याय दिलाना और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। बदरीनाथ धाम के चढ़ावे और धार्मिक व्यवस्थाओं को लेकर भी कांग्रेस को आरोप लगाने के बजाय तथ्यों के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर आपत्तियां दर्ज कराने की वैधानिक प्रक्रिया मौजूद है। लोकतंत्र में सवाल उठाना अधिकार है, लेकिन तथ्यों के बिना आरोप लगाना और जनता को भ्रमित करना जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका नहीं हो सकती।
श्री चैधरी ने कहा कि गैरसैंण में विधानसभा घेराव करने जा रही कांग्रेस को बेरोजगारी, पलायन, महिला सुरक्षा और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर अपना स्पष्ट पक्ष रखना चाहिए। विपक्ष की जिम्मेदारी केवल सरकार का विरोध करना नहीं, बल्कि जनसमस्याओं के समाधान के लिए व्यावहारिक विकल्प प्रस्तुत करना भी है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विकास, जनसुविधाओं के विस्तार और जनकल्याण के लिए लगातार काम कर रही है। कांग्रेस को इन प्रयासों की तथ्यों के आधार पर समीक्षा करनी चाहिए और कमियां होने पर ठोस सुझाव देने चाहिए। केवल विरोध के लिए विरोध करने से उत्तराखंड की जनता का भला नहीं होगा।
श्री चैधरी ने कहा कि उत्तराखंड की जनता को कांग्रेस की न्याय यात्रा नहीं, उसके शासनकाल का हिसाब चाहिए। जो कांग्रेस अपने कार्यकाल में जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी, वह आज न्याय के नाम पर राजनीतिक स्वार्थ साधने निकली है। गैरसैंण में घेराव और सड़कों पर यात्राएं निकालने से कांग्रेस अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकती। जनता जानना चाहती है कि प्रदेश के विकास, युवाओं के रोजगार, पहाड़ से पलायन और महिला सुरक्षा जैसे सवालों पर कांग्रेस के पास क्या ठोस समाधान है। उत्तराखंड की जनता अब खोखले नारों और राजनीतिक दिखावे से संतुष्ट होने वाली नहीं हैय उसे काम, जवाबदेही और स्पष्ट विजन चाहिए। कांग्रेस को जनता को गुमराह करने की राजनीति छोड़कर अपने शासनकाल का हिसाब देना चाहिए।
