
प्रेस क्लब में साहित्यक संगोष्ठी आयोजित
निर्झर ने विष्णु खरे व कुलदीप चंदेल ने दिनकर के व्यक्तित्व व कृतत्व पर किया पत्रवाचन
बिलासपुर
राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती के उपलक्ष्य में रविवार को प्रेस क्लब में एक साहित्यक संगोष्ठी आयोजित की गई। सेवानिवृत जिला भाषा अधिकारी डा. अनिता शर्मा ने मु यतिथि व कमांडेंट सुरेंद्र शर्मा ने संगोष्ठी की अध्यक्षता की। मंच संचालन रविंद्र भटटा ने किया। मशूहूर साहित्यकार व पत्रकार विष्णु खरे तथा पांवटा साहिब के कवि नागेंद्र तरूण की पत्नी उपासना की आकस्मिक मृत्यु पर दिवंगत आत्मा को श्रद्धाजंलि दी गई। साहित्यकार रतन चंद निर्झर ने विष्णु खरे व कुलदीप चंदेल ने दिनकर के व्यक्तित्व व कृतत्व पर पत्रवाचन किया। जबकि प्रदीप गुप्ता ने फिल्मी दुनिया के मशहूर मशहूर बीआर चोपड़ा पर पत्रवाचन किया। सर्वप्रथम अमरनाथ धीमान ने संयाणे रिया गल्लां सिरे मथ्थे लाणियां , ऐ गल्लां कदी नी पुलाणियां ………, हुसैन अली ने कोई पक्का इरादा क्यों नहीं, तु हें खुद पर भरोसा क्यों नहीं .., डा. जय नारायण कश्यप ने लिचिंग शब्द नया है , मायने वहीं पुराने है, प्यादे प्यादे से मरवाने हैं …, अरूण डोगरा ने बनते ही विधायक व मंत्री गाने लगा कुर्सी गान, कोई पूछे तो कह देते हो रहा है, भारत निर्माण…, ओंकार कपिल ने बिगडुरिया औलादा जो समझाई लेणां, नशे ते दूर रई जाणां.., आनंद सोहड़ ने भारत मां के भाल की हिंदी, भारत मां का गौरव हिंदी …., जीत राम सुमन ने इत्थी उल्लू आउंदे नेरियां राति …, रतन चंद निर्झर ने दिनकर की हिमालय बारे कविता सुनाई। तू ध्यान मग्न हो रहा, विरान हो रहा मेरा देश …, कुलदीप चंदेल ने सर्दी के मौसम के आने पर कविता सुनाई.. सरादडू स्याला श्राद्धच जमदां ,नूरातु आउंदा बडिखदा नूरातायच, सुशील पुंडीर ने जो जिंदा बर्जुगों को रोटी नहीं दे सकदे, उन्हें श्राद्ध मनाने का क्या फायदा , सुखराम आजाद ने … सौंण मीने पिंगा पईयां, आईए सजना चूटे चांईया, शिव पाल गर्ग ने मैंने कुछ गीत लिखें है, सुनाऊं क्या तु हें, … सुमन गुप्ता
ने जवानी के हिले हया के बहाने गजल सुनाई। रविंद्र भटटा ने बलात्कार सिरफिॅरों का चस्का बनता जा रहा है, समाज का सीना छलनी हो रहा है.., प्रतिभा शर्मा ने साहित्य आपका दिनकर, यही पैगाम देता है,करोगों जो कर्म अच्छे तो ईश्वर थाम लेता है। अलौलिक शर्मा ने तू गीत प्रेम का गाता चल।

इस अवसर पर मु यतिथि डा. अनिता शर्मा ने फेसबुक पर बतियाते हैं, सामने मिल जाएं तो बात करने से कतराते हैं कविता सुनाका अपना सा होता अजनबी शहर गद्य सुनाया। उन्होंले कहा कि राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर का संघर्ष पूर्ण जीवन रहा है। उनका साहित्य समाज को जगाने वाला है। प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के समय दिनकर को राज्यसभा सदस्य मनोनीत किया गया था। एक बार वे नेहरू के साथ संसद की सीढिय़ा चढ़ रहे थे , अचानक नेहरू लडखड़ाए तो दिनकर ने उन्हें थाम लिया। इस पर नेहरू ने थैंक्यू कहा। दिनकर पलट कर बोले थैंक्यू किस बात का। जब जब राजनीति लडख़डाई , तो साहित्य ने ही उसे संभाला। संगोष्ठी में व्यापार मंडल के महामंत्री सुरेंद्र गुप्ता व पंडित संजय मिश्रा भी उपस्थित रहे।
