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जिलाधिकारी अपने कार्यालयों में बैठ कर मीडिया में झूठे वक्तब्य दे रहे : रामलाल ठाकुर

Byjanadmin

Sep 26, 2018

जिलाधिकारियों तथा राजस्व विभाग के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए जाएँ

दर्जनों गावों का अन्य क्षेत्रों से संपर्क पूरी तरह से टूटा

बिलासपुर
बिलासपुर जिले में कितने ही स्थानों पर दर्जनों मकानों के धवस्त हो जाने और काफी मात्रा में सड़कों के बंद हो जाने से दर्जनों गावों का अन्य क्षेत्रों से संपर्क पूरी तरह से टूट जाने के कारण पैदा हुई कठिनाइयों और परेशानियों का विवरण देते हुए कहा कि जिलाधिकारी केवल मात्र अपने कार्यालयों में बैठ कर मीडिया में झूठे वक्तब्य दे रहे हैं जबकि फील्ड की सच्चाई बिलकुल उससे भिन्न है और लोग परेशानियां झेलने को विवश हैं। यह बात सरकिट हाउस में पत्रकारों को संबोधित करते हुए नयनादेवी के विधायक पूर्व मंत्री और अब राज्य कांग्रेस के राज्य महासचिव रामलाल ठाकुर ने कही। उन्होंने कहा कि उनके बार बार के आग्रह के बावजूद भी राजस्व अधिकारी तो क्या क्षेत्र के पटवारी तक भी अधिकाँश स्थानों पर नुक्सान का आकलन करने नहीं पहुंचे हैं जबकि जिला प्रशासन की नितांत ढील व निंदनीय लापरवाही और दाईत्व हीनता अपनी चरमसीमा पर देखने को मिली है। ठाकुर ने कहा कि इस वर्षा से अधिकतर नुक्सान बिलासपुर जिला की कोई एक दर्जन खड्डों और नालों के किनारे की खेतिहर भूमि को पहुंचा है जिससे किसानों की धान और मक्की आदि की फसले पूरी तरह से तबाह हो गई हैं। उन्होंने कहाकि राष्ट्रीय उच्च मार्ग -21 तथा पिछले पांच वर्षों से निर्माणाधीन फोरलेन सड़क की हुई दुर्दशा के कारण हजारों सीमेंट फैक्ट्री के ट्रकों और बाहर से आने वाले पर्यटकों तथा स्थानीय लोगों को भारी हानि पहुच रही है। रामलाल ठाकुर ने कहा कि हिमाचल सरकार पहले ही 46 हजार करोड़ के भारी कर्ज के नीचे दबी है ,जो इस वर्षा के कारण हुई कोई पांच हजार करोड़ की भारी हानि की भरपाई नहीं कर सकती है। इसलिए केंद्र सरकार को चाहिए कि तुरंत हिमाचल को आर्थिक पैकज देकर उचित राहत प्रदान करे ताकि प्रदेश की जंनता का अस्त ब्यस्त हुआ दैनिक जीवन पटरी पर आ सके। इस अवसर पर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता प्रताप कौडल और महासचिव संदीप सांख्यान भी उपस्थित थे। ठाकुर ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से आग्रह किया है कि बिलासपुर जिला सहित सारे हिमाचल प्रदेश भर में निरंतर हुई भारी वर्षा के कारण हजारों लोगों को सडकों, रास्तों , पेयजल तथा बिजली और मकानों तथा गो-शालाओं आदि के गिर जाने अथवा बह जाने से हुई भारी हानि के कारण पैदा हुई आपदा का सामना करने और लोगों को उचित राहत पहुचाने के लिए जिलाधिकारियों तथा राजस्व विभाग के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए जाएँ ताकि इस विषय में चारों ओर से आ रही सुस्ती व लापरवाही की शिकायतों से सरकार के प्रति जनता में फैल रहे रोष व आक्रोश पर भी अंकुश लग सके। उन्होंने कहाकि इस विषय में ढील बरतने वाले अधिकारियों के प्रति यदि सरकार को ऊँगली टेढ़ी भी करनी पड़े तो जनहित में तुरंत उचित कार्यवाही करनी चाहिए ताकि लोगों को राहत मिल सके।

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