सआदत हसन मंटो की कहानी खोल दो का हुआ मंचन
बिलासपुर के उड़ान थियेटर ग्रुप की प्रस्तुति
भाषा एवं संस्कृति विभाग का रहा सहयोग
बिलासपुर के रंगकर्मी अभिषेक डोगरा ने किया निर्देशन
जनवक्ता डेस्क बिलासपुर
सआदत हसन मंटो पंजाबी साहित्य का वो नाम है जिसने अपने छोटे से जीवन काल में वो कर दिखाया जहां पहुंचने में सदियां लग जाती है । मंटो की कहानियों को मंच पर उतारना आसान नहीं लेकिन बिलासपुर के रंगकर्मी अभिषेक डोगरा ने यह कर दिखाया है । पापा, मोहणा, खालिद की खाला, कर्मवीर, मासूमियत, बेटी है अनमोल जैसे नाटकों सहित कई अन्य सामाजिक विषयों को लेकर प्रदेश भर में नाटकों के माध्यम से अपनी धाक जमाने वाले ‘उड़ान थियेटर ग्रुप ’ ने बिलासपुर में भाषा एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से सआदत हसन मंटो की कहानी ‘खोल दो ’ का मंचन कर भारत पाकिस्तान विभाजन के समय जो त्रासदी व यातनाएं लोगो ने सहन की ,उसकी याद ताजा करा दी । कहानी एक मुस्लिम परिवार सिराजुदीन के इर्द गिर्द बुनी गई है । एक हंसता खेलता परिवार विभाजन के वक्त अपनी बेटी व पत्नी को खो देता है । कहानी बहुत ही मार्मिक मोड़ ले लेती है जब दंगई सिराजुदीन की मासूम बेटी सकीना को उठा लेते हैं,और दुष्कर्म के बाद उसे रेल की पटरी पर मरने के लिये फेंक देते है । बाप अपनी बेटी सकीना की तलाश में दर दर भटकता है । गुंडे बाप को दिलासा दिलाते हैं ,लेकिन दरिंदे उसके साथ हैवानियत करते हैं ,सकीना चीखती चिल्लाती है मगर उसकी चीखें किसी को सुनाई नही देती। बाप सिराजुदीन की भूमिका बालीवुड व टेली-सिनेमा के कलाकार अभिषेक सोनी और बेटी सकीना की भूमिका शिवांगी रघु ने निभाई । इस नाटक का निर्देशन अभिषेक डोगरा ने किया । अन्य कलाकारों में नवीन सोनी, किरण, मिलाप, मन्नत का अभिनय सशक्त रहा । प्रकाश व्यवस्था की जिम्मेवारी उस्मान शेख तो मंच सज्जा करण चंदेल व निशांत कपूर ने निभाई। नाटक का प्रस्तुति करण बहुत ही दमदार रहा । दर्शक जब थियेटर से बाहर आ रहे थे तो सबकी आंखों में आंसू थे तथा सभी कलाकारों के शानदार अभिनय की प्रशंसा कर रहे थे ।



