फोरलेन के लिए अधिगृहीत की गई भूमि का चार गुना मुवावजा दिये जाने की मांग की
जनवक्ता डेस्क, बिलासपुर
हिमाचल प्रदेश में प्राय डेढ़ वर्ष से राज कर रही भाजपा की मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर नेत्रत्व वाली सरकार क्या वास्तव ही में अपनी पार्टी के केंद्रीय व राज्य के भाजपा नेताओं द्वारा जनता से की गई प्रतिबद्धताओं और घोषणाओं पर अमल करने के लिए तैयार नहीं है ?याफिर सत्ता में आकर कुर्सी की चकाचौंध में प्रदेश में नये बने भाजपा के सत्ताधारी नेता अब जनता के प्रति अपने दायित्वों को निभाने से मुंह मोड़ रहे हैं और यह कह कर अपना दामन बचाने की कोशिश कर रहे हैं कि स्वयं उन्होने तो चुनाव से पहले ऐसा कोई वादा उनसे नहीं किया था ?आज यहाँ कितने ही फोरलेन विस्थापित व प्रभावित ग्राम्य नेताओं ने यह प्रश्न उठाते हुए कहा कि जब इससे पहले हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की वीरभद्र सिंह सरकार थी , तो उस समय ,पिछले विधान सभा चुनाव से पहले , कोई पौने दो वर्ष पूर्व केद्रीय सरकार ने व भाजपा के एक वरिष्ठ नेता और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने हमीरपुर में आयोजित एक बहुत बड़े समारोह में यह घोषणा की थी कि केंद्र की भाजपा की मोदी सरकार तो केंद्र सरकार द्वारा निर्मित की जा रही फोरलेन सड़क निर्माणों के लिए अधिगृहीत की जा रही लाखों किसान परिवारों की भूमि का मुवावजा मार्केट रेट के चार गुना देने को तैयार है ,किन्तु उस समय प्रदेश की वीरभद्र सिंह नेत्रत्व वाली कांग्रेस सरकार केंद्र सरकार द्वारा घोषित चार गुना मुवावजा दिये जाने की बजाए दो गुना देने पर ही अड़ी हुई है | इसी समारोह में उपस्थित भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री तथा विधान सभा चुनाव के बाद फिर से मुख्यमंत्री बनाए जाने के लिए पार्टी की ओर से प्रस्तावित प्रोफेसर प्रेमकुमार धूमल ने भी फोरलेन विस्थापित सभी किसानों को उनकी अधिगृहीत की गई भूमि का चार गुना मुवावजा दिये जाने की घोषणा व वादा किया था ,जिसके परिणाम स्वरूप ही फोरलेन विस्थापित व प्रभावित लाखों किसान परिवारों ने विधान सभा चुनाव में पूरे ज़ोर-शोर से भाजपा के पक्ष में वोट देकर उससे सत्ता में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी |
अब यह फोरलेन विस्थापित व प्रभावित नेता हैरान हैं कि अब जब केंद्र और प्रदेश में भाजपा की ही सरकारें हैं ,तो फिर क्या कारण है कि अपनी पूर्व घोषणाओं और दृष्टि पत्र में किए गए वादे के अनुसार फोरलेन विस्थापित लाखों परिवारों की इस मुख्य मांग को मानने और उनकी जबरदस्ती छीन ली गई भूमि का चार गुना मुवावजा देने में जयराम सरकार क्यूँ आना कानी कर रही है ? या फिर कभी वार्ता से इस मसले को सुलझाने और कभी कमेटी बना कर इस मामले को लटकाने जैसी झूठी आशाएँ बंधा कर एक बार फिर से चुनाव जीत लेने का ही प्रयास कर रहे हैं

