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हिमाचल होटल मज़दूर लाल झंडा यूनियन सम्बन्धित सीटू का अट्ठाइसवां सम्मेलन शिमला के कालीबाड़ी हॉल में सम्पन्न

Byjanadmin

Dec 19, 2018


जनवक्ता ब्यूरो शिमला
हिमाचल होटल मज़दूर लाल झंडा यूनियन सम्बन्धित सीटू का अट्ठाइसवां सम्मेलन शिमला के कालीबाड़ी हॉल में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में 250 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में 25 सदसीय नई कमेटी का गठन किया गया। बालक राम को अध्यक्ष,विनोद बिरसांटा को महासचिव,पवन शर्मा को कोषाध्यक्ष, किशोरी ढटवालिया,पूर्ण चन्द,मोहन को उपाध्यक्ष, कपिल नेगी,सतपाल बिरसांटा,राकेश कुमार को सचिव चुना गया। कमेटी में सुरेश शर्मा, मनोहर,चमन,दुष्यंत,रणजीत,राजेन्द्र,देविंद्र,सुरेश मेहता,धर्मदास,बाबू राम,जगदीश,परषोत्तम,विरेन्द्र नेगी,श्याम लाल,अनिल,पवन को चुना गया।

सम्मेलन को सीटू राज्याध्यक्ष जगत राम,राज्य सचिव विजेंद्र मेहरा,राज्य कोषाध्यक्ष रमाकांत मिश्रा,जिला सचिव बाबू राम आदि ने सम्बोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच व राष्ट्रीय फेडरेशनों के आह्वान पर शिमला के होटल उद्योग के सभी मजदूर 8-9 जनवरी 2019 को शिमला शहर में पूर्ण हड़ताल करेंगे। इस दिन होटल के हज़ारों मजदूर काम बंद रखेंगे व सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे। शिमला में 8 जनवरी को प्रदेश सरकार सचिवालय छोटा शिमला व 9 जनवरी को सब्जी मंडी ग्राउंड पर विशाल जनसभाएं आयोजित की जाएंगी। उन्होंने केंद्र सरकार को चेताया है कि वह मजदूरों व किसानों के खिलाफ काम करना बंद करे अन्यथा मजदूर किसान सड़कों पर जोरदार आंदोलन कर मोदी सरकार को सत्ता से बाहर कर देंगे।

उन्होंने कहा है कि वर्तमान मोदी सरकार पूंजीपतियों व नैगमिक घरानों के लिए कार्य कर रही है। इस सरकार के कार्यकाल में मजदूरों का शोषण तेज हुआ है। इस सरकार के गलत निर्णयों के कारण देश के लेबर ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार लगभग पन्द्रह लाख मजदूरों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी परिवर्तन किए जा रहे हैं। पक्के रोजगार के बजाए आउटसोर्स,कॉन्ट्रैक्ट व पार्ट टाइम पर नौकरियां दी जा रही हैं।

नवनिर्वाचित अध्यक्ष बालक राम व महासचिव विनोद बिरसांटा ने कहा कि जयराम ठाकुर के नेतृत्व में चल रही हिमाचल प्रदेश की भाजपा सरकार प्रदेश में मजदूर विरोधी नीतियों को लागू कर रही है। प्रदेश में मजदूरों को दिया जा रहा 6750 रुपये न्यूनतम वेतन पूर्वोत्तर के पांच छोटे राज्यों को छोड़कर पूरे भारतवर्ष में सबसे कम है। यह वेतन उपभोक्ता मूल्य अथवा महंगाई सूचकांक के साथ नहीं जोड़ा गया है। उन्होंने मांग की है कि मजदूरों का न्यूनतम वेतन अट्ठारह हज़ार किया जाए। ठेका प्रथा पर रोक लगाई जाए। समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए। श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी परिवर्तनों पर रोक लगाई जाए। आउटसोर्स व कॉन्ट्रैक्ट पॉलिसी पर रोक लगाई तथा कच्चे रोजगार की जगह स्थायी रोजगार दिया जाए।

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