
जनवक्ता डेस्क बिलासपुर
नगर के साथ सटी चांदपुर पंचायत में सचिव द्वारा एक व्यक्ति से उनका कार्य करने के लिए डाटा एंट्री आपरेटर मुहैया करवाने का विडियो शनिवार को वायरल हुआ। एक सरकारी कर्मचारी द्वारा एक नागरिक द्वारा बच्चों का नाम दर्ज करने के एवज समय न होने की बात कहना तथा 235 शुल्क व डाटा एंट्री आपरेटर की मांग करना आदि की बहस का विडियो सोशिल मीडिया पर चर्चा का विषय रही। चांदपुर में स्थित निजी अस्पताल में होने वाले शिशु का रिकार्ड सबसे पहले वहीं की पंचायत में नियमानुसार दर्ज होता है लेकिन निजी अस्पताल के मालिक द्वारा आरोप लगाया कि उक्त पंचायत सचिव नवजात शिशुओं के नाम दर्ज करने के लिए आनाकानी करता हैं। वायरल विडियो में सचिव उस व्यक्ति से डाटा एंट्री आपरेटर खुद का लाने की भी बात कर रहा है। हैरानी की बात है कि यदि निजी काम करवाने के लिए स्वयं का डाटा एंट्री आपरेटर से पंचायत कार्यालय में जाकर सरकार के कंप्यूटर पर काम करवाया जाए तो सिस्टम की क्या विश्वसनीयता रह जाएगी। सचिव जहां उस व्यक्ति ने लिखित तौर पर डाटा एंट्री आपरेटर को मुहैया करवाने की बात कर रहा है वहीं दूसरा व्यक्ति सरकार के काम का हवाला दे रहा है। वहीं पंचायत सचिव ने स्वीकारा कि वे एक शिशु जन्म प्रमाणपत्र जारी करने के 235 रूपए लेते हैं। जिस पर सचिव इस राशि के लेने के लिए ग्राम सभा के प्रस्ताव का हवाला दे रहे हैं। इस पर संबंधित अधिकारी क्या संज्ञान लेते हैं यह देखना अभी बाकी है जबकि शिकायतकर्ता मामले को उच्चाधिकारियों के पास पंजीकृत पत्र के माध्यम से भेजने की बात कर रहा है। इस सारे प्रकरण का विडियो सोशिल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस बारे में पंचायत प्रधान ने बताया कि पंचायत में पडने वाले दो संस्थानों के प्रभारियों को बुलाया था लेकिन वह नहीं आए। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों से पंचायत के कल्याण हेतु कुछ वार्ता एवं कर लगाने की बात की जानी थी ताकि पंचायत की आमदन बढ़ सके।
