ट्राऊट पालकों के उत्थान की दिशा में बेहतर कार्य करने के लिए हिमाचल प्रदेश शीतजल मत्स्य पालन विकास और चुनौतियों पर सम्मेलन आयोजित
जलाश्यों में मेगा एक्यूरियम स्थापित करने के लिए किए जा रहे प्रयास
बिलासपुर में मत्स्य पालन की आपार संभावनाएं-सुभाष ठाकुर
जनवक्ता डेस्क, बिलासपुर
किसानों की आय को 2022 तक दौगुणा करने के प्रधानमंत्री के सपने को साकार करने के लिए प्रदेश में नील क्रांति मछुआरों के लिए वरदान साबित होगी इससे मछुआरे आर्थिक रूप से मजबूत होकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ेंगे तथा युवाओं के लिए भी स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। यह जानकारी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री वीरेन्द्र कंवर ने लेक-ब्यू स्थित सभागार में हिमाचल प्रदेश शीतजल मत्स्य पालन विकास और चुनौतियों पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में सम्बोधित करते हुए दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य के मत्स्य पालकों को अनेकों समस्याओं, प्राकृतिक आपदाओं व अन्य चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस सेमीनार के माध्यम से प्रदेश के अलावा बाहरी राज्यों से आए विशेषज्ञों व मत्स्य पालकों के अनुभवों का लाभ प्राप्त करके ट्राऊट पालकों के उत्थान की दिशा में और अधिक बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी ताकि अधिक से अधिक युवा इस व्यवसाय से जुड़कर अपने लिए स्वरोजगार के अवसर पैदा कर सकें।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास को बढ़ावा देने के लिए उद्योग, पर्यटन, कृषि के अतिरिक्त मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए भी प्रदेश में विभिन्न जलाश्यों में मेगा एक्यूरियम स्थापित करने के लिए केन्द्र सरकार के समक्ष प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 4 प्रोसैेसिंग ईकाईयां स्थापित की जा रही है इसी प्रकार फीड के लिए भी यूनिट स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मछली उत्पादन में बढौतरी लाने के लिए स्थानीय मछुआरों को हैचरी लगाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने प्रदेश में घट रहे मछली उत्पादन की वास्तविक स्थिति की जानकारी के लिए कलकत्ता के मत्स्य पालन संस्थान से सर्वे करवाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रति वर्ष केन्द्रीय प्रायोजित योजना नील क्रान्ति, अनुसूचित जाति, जनजाति उपयोजना एवं राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अन्तर्गत नए ट्राऊट यूनिट, हैचरियाँ, रिटेल आऊटलेट व प्रससंकरण केन्द्र स्थापित किए जा रहे हैं जो प्रदेश के लोगों को ट्राऊट पालन के क्षेत्र में नवीन रोजगार उपलब्ध करवा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016-17 में नील क्रान्ति योजना के अन्तर्गत केन्द्र सरकार द्वारा प्रदेश को 1082.32 लाख रूपये की वित्तीय सहायता प्रदान कि गई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017-18 में केन्द्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश को 682.77 लाख रूपए प्रदान की गई। जिससे ट्राऊट हैचरियां, ट्राऊट ईकाईयां, विभागीय ट्राऊट फार्मो पर सौर ऊर्जा संयन्त्र व ट्राऊट फार्म पतलीकुहल में समोकड ट्राऊट कैनिंग यूनिट की स्थापना की जा रही है। उन्होंने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में विभिन्न योजनाओ के अन्तर्गत लगभग 32.42 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत करवाई गई है। उन्होंने बताया कि चालू वित वर्ष में स्वीकृत 1662.0015 लाख रूपये में से 50 प्रतिशत की राशि, 852.5287 लाख रूपये केन्द्र से प्राप्त हुई है जिसमें से ट्राऊट हैचरियां, ईकाईयां, फिड मिले, रिटेल आऊटलेट, ट्राऊट कलस्टर व कोलडैम जलाशय में ट्राऊट केज स्थापित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में मत्स्य पालन व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए अनेकों योजनाओं को क्रियान्वित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इन योजनाओं के माध्यम से मत्स्य पालकों को बिजली की ऊंची दरें, महगें व्याज दरों पर बैंक ऋण, ट्राऊट फीड का अत्यधिक मूल्य, प्राकृतिक आपदाओं में बीमें का अभाव इत्यादि से नहीं जूझना पड़े इसके लिए इन चुनौतियों व समस्याओं के गहन अध्ययन व उसके समाधान के लिए इस सेमीनार के सार्थक परिणाम सामने आएंगें। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए मत्स्य पालन को कृषि व्यवसाय से जोड़ने के भी प्रयास किए जा रहे हैं ताकि किसानों को मिलने वाली सभी सुविधाएं व लाभ मत्स्य पालन का व्यवसाय करने वाले लोगों को भी मिल सके।
विधायक सुभाष ठाकुर ने कहा कि जिला बिलासपुर में मत्स्य पालन के व्यवसाय की आपार संभावनाएं हैं। युवा वर्ग इस व्यवसाय को अपनाकर अपने लिए स्वरोजगार के साधन पैदा करके अपने परिवार की आर्थिकी को भी सुदृढ़ करके जीवन स्तर में सुधार ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि मछली पालकों को मछली उत्पादन के लिए बीज बाहरी राज्यों से लाना पड़ता है जो कि प्रदेश के तापमान के अनुकुल न होने के चलते मछली उत्पादन में कमी लाता है। उन्होंने कहा कि मछली पालक यदि मछली के बीज का उत्पादन अपने क्षेत्र के तापमान के अनुसार स्थानीय स्तर पर करेंगे तो निश्चित रूप में मछली उत्पादन में बढौतरी होगी। उन्होंने कहा कि गोबिन्द सागर प्रदेश का बहुत बड़ा जलाश्य है यहां पर मेगा एक्यूरिम के स्थापित होने से जहां मछुआरों की आय में बढ़ौतरी होगी वहीं पर्यटकों की आमद भी बढ़ेगी।
निदेशक एवं प्रारक्षी मत्स्य, सतपाल मेहता ने अपने स्वागत सम्बोधन में कहा कि मछली पालन देश में बढ़ती जनसंख्या के लिए पौष्टिक (प्रोटीन) आहार उपलब्ध करवाने के साथ-साथ आय बढ़ाने में महत्पूर्ण भुमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग प्रदेश में मछली उत्पादन को बढ़ाने एवं विभिन्न स्त्रोतों को वास्तविक स्वरूप में बनाए रखने के लिए प्रयासरत है जिसके लिए विभाग द्वारा विभिन्न विकासात्मक योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विभागीय कार्यक्रमों के बारे में लोगों को अधिक से अधिक जानकारी प्रदान करने के लिए विभाग द्वारा प्रतिवर्ष प्रशिक्षण एवं जागरूकता शिविरों का आयोजन करवाया जाता है ताकि इन कार्यक्रमों के बारे लोगों को अधिक ज्ञान उपलब्ध करवाकर इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को लाभान्वित किया जा सकें।
इस अवसर पर मछली उतपादन के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने के लिए मंडी के राजीव जसवाल तथा पतलीकूहल के हरीश ठाकुर को भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर केन्द्रीय सरकार के डा0 सलीम सुल्तान, वरिष्ठ सलाहकार डेयरी व मत्स्य, डा0 आरएन पंडिता, डा0 मधवाल, डा0 एम कार्तिकेन, डा0 जार्ज, डा0 एन पाण्डेय, डा0 राजेश, डा0 मधु शर्मा, डा0 मुहम्मद असरफ, डा0 बीडी शर्मा ने सम्मेलन में अपने अनुभव सांझा किए।
इस मौके पर मंडलाध्यक्ष कुलदीप ठाकुर, मंडलाध्यक्ष कुटलैहड़ मनोहर शर्मा, एपीएमसी अध्यक्ष हंसराज ठाकुर, महामंत्री प्यारे लाल चैधरी, पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष आशीष ढिल्लों, एडीएम श्रवण मांटा, पीओ डीआरडीए संजीत सिंह, बीडीओ गौरव धीमान के अतिरिक्त प्रदेश भर के मत्स्य अधिकारी एवं मत्स्य पालक तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


