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दो दिवसीय लेखन एवं सांस्कृतिक कार्यशाला का समापन

Byjanadmin

Feb 10, 2019

कार्यशाला में लगभग 35 सदस्यों ने भाग लिया

जनवक्ता डेस्क, बिलासपुर
बिलासपुर लेखक संघ और भाषा एवं संस्कृति विभाग बिलासपुर के संयुक्त तत्वाधान में आज चाँदपुर स्थित व्यास सभागार में दो दिवसीय लेखन एवं सांस्कृतिक कार्यशाला का समापन हो गया।कार्यशाला में लगभग 35 सदस्यों ने भाग लिया ।कार्यशाला के प्रथम सत्र के प्रथम भाग में चंबा से आए साहित्यकार एवं स्रोत व्यक्ति अशोक दर्द ने जिला के लेखकों एवं साहित्यकारों को अनेक नई जानकारियां दी ।उन्होंने कहा कि लेखक को अपनी व समाज की पूरी जानकारी होनी चाहिए ।लेखक की भाषा सरल होनी चाहिए, अत्यंत कठिन शब्दों को लिखने से बचना चाहिए । लेखक के पास जितना अनुभव होगा उतना ही भाषा में सुदृढ़ व सजग होगी । लघु कथा लिखने में शैली का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए ।द्वितीय सत्र में मंडी से आए जगदीश कपूर ने भी लघुकथा लेखन पर अनेक जानकारियां लेखकों को दी उन्होंने कहा कि लघुकथा की अनिवार्यता उसकी संक्षिप्तता है । लघु कथा स्टीक व प्रखर होनी चाहिए । छोटा लिखे को लोग समय की कमी होने के बावजूद भी पढ़ पाते हैं जबकि लंबा कोई नहीं पढ़ता है लघु कथा होठों की मुस्कान है तथा लोगों की आत्मा होती है ।लेखक जब तक घटना में अपने आप को डूबो नहीं लेता ,लघुकथा नहीं लिख सकता ।लघुकथा विशेषत: घटना प्रधान होती है, पात्र प्रधान नहीं। लघु कथा वर्तमान की अक्सर वर्तमान की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिखी जाती है ।संवाद वैसे ही होने चाहिए जैसे बोले गए हैं द्वितीय सत्र में रोशनलाल शर्मा ,प्रधान लेखक संघ ने भी गुगा जाहर पीर के बारे में चर्चा की तथा उनके इतिहास के बारे में और उनके बारे में प्रचलित और वास्तविक घटनाओं का जिक्र किया।द्वीतीय दिवस में सुरेंदर मिन्हास द्वारा संयोजक की भूमिका निभाई गयी,अपने सत्र में उन्होंने बताया कि जब लेखक संघ ने गुग्गा जाहर पीर की पुस्तक लिखी तो किन किन स्थानों पर जाना पड़ा तथा उन्होंने किस किस प्रकार से जानकारियां इकट्ठी करके इस पुस्तक के प्रकाशन को सम्भव बनाया।इसी विषय पर राजेन्द्र कुमार बंसल ने अपने विचार प्रशिक्षुओं के साथ सांझा किया।उन्होंने लोकदेवता की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गुग्गा जाहरपीर भी प्रसिद्ध लोकदेवता हुए हैं और उन्हें विभिन्न राज्यों में अपनी अपनी शैली के रूप में पूजा जाता है द्वितीय सत्र में मुख्य अतिथि जयकुमार द्वारा प्रशिक्षुओं को संबोधित किया गया तथा लेखक संघ की वेबसाइट का उद्घाटन किया गया ।कार्यशाला में सुरेंद्र मिन्हास, रविंद्र कुमार शर्मा , बुद्धि सिंह चंदेल ,अमरनाथ धीमान, राजेंद्र कुमार बंसल, कर्नल जसवंत सिंह चंदेल, एनआर हितैषी,बीरबल धीमान, नीलम चंदेल, रविंद्र चंदेल कमल, वीना वर्धन ,विजय कुमारी सहगल, ललिता कश्यप ,विक्रम कुमार ,इंद्र सिंह चंदेल ,जावेद इकबाल, हेमा ठाकुर ,अनिल शर्मा नील,जसवंत सिंह चंदेल ,द्वारिका प्रसाद ,भीम सिंह नेगी , रूप शर्मा ,हेमराज शर्मा ,सीताराम शर्मा ,लशकरी राम ,सुशील पंडित, लेख राम शर्मा ,पवन चौहान , कृष्ण चंद्र महादेविया , गंगाराम, प्रोमिला भारद्वाज ,सुनीता शर्मा ,यशपाल चंदेल ,वनीता चंदेल, विश्वजीत शर्मा इत्यादि सदस्यों ने भाग लिया।कार्यशाला में लेखक संघ द्वारा प्रकाशित पुस्तकों की प्रदर्शनी लगाई गयी।

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