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भाजपा और कांग्रेस की उदासीनता के कारण पिछले 12 वर्षों से लटका
जनवक्ता डेस्क, बिलासपुर
जिस पुल के लिए बिलासपुर नगर के ठीक सामने दिख रहे गोबिन्द सागर के उस पार के लाखों ग्रामीण और कोई तीन दर्जन पंचायतों के भाखड़ा विस्थापित मांग करते रहे हैं , उसी बहुचर्चित लुहनू ( खैरियां ) –बैरी दड़ोला पुल का निर्माण कार्य दोनों ही मुख्य राजनीतिक दलों भाजपा और कांग्रेस की उदासीनता के कारण पिछले 12 वर्षों से लटका पड़ा है | दोनों ही दलों के बड़े बड़े नेताओं ने हर बार चुनाव आने पर इस पुल पर राजनीति करते हुए इसके निर्माण की घोषणाएँ तो अवश्य की , किन्तु इसका निर्माण एक इंच भी आगे नहीं बढ़ पाया |राजनेतिक इच्छा शक्ति के अभाव में अब इस पुल का निर्माण ब्यय 1645 करोड रुपए से बढ़ कर 265 करोड रुपए के आंकड़े पर आ पहुंचा है और इसमें इसी प्रकार देरी होती रही तो फिर यह आंकड़ा यूं ही बढ़ता चला जाएगा | जबकि अधिकारी भी केवल मात्र बहाना बनाने के लिए इन सभी पिछले वर्षों में इस पुल तक पहुँचने वाली कुल 650 मीटर संपर्क सड़क की लंबाई के अधिग्रहण की फाइलों के घोड़े इधर से उधर दौड़ाने मात्र में ही अपने उतरदायित्व की इतिश्री मान रहे हैं | जबकि लाखों लोग इस पुल के अभाव में निरंतर परेशान हो रहे हैं |
सूचना के अधिकार के नीचे प्राप्त सूचना के अनुसार तब चुनाव के ऐनमोके पर 23 मार्च,2007 को पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिह ने आनन- फानन में झंडूता क्षेत्र को बेरी दाड़ोला से लुहनू को गोबिन्द सागर पर पुल डाल कर नगर से जोड़ने की बजाए इसका लिंक नगर से कई किलोमीटर ऊपर तलवाड़ गाँव से जोड़ने के लिए बड़ी ही धूम धाम से समारोह पूर्वक हजारों लोगों की उपस्थिती में इसे 165 करोड रुपए के व्यय से निर्मित किए जाने के लिए शिलान्यास कर दिया था |
किन्तु चुनाव के बाद सरकार बदल गई और भाजपा के शीर्ष नेताओं ने लोगों के बार बार के आग्रहों को ठुकराते हुए इस पुल निर्माण को ठंडे बस्ते में डालते हुए यह कहा कि इस पुल पर खर्च होने वाले कुल व्यय से कम से कम अन्य तीन बड़े पुल अन्यत्र प्रदेश में डाले जा सकते हैं |किन्तु बाद में फिर अगले चुनाव आने पर वहीं भाजपा नेता दोबारा सत्ता में आने पर इसे जरूर बनाने की घोषणाएँ करने लगे |
वर्ष 2013 के विधान सभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की जीत हुई और वीरभद्र सिंह दोबारा मुख्यमंत्री बने और फिर उन्होने अपने द्वारा ही किए गए इस पुल के शिलान्यास का अपमान करते हुए यह घोषणा कर दी कि अब फोरलेन सड़क निर्माण के कारण नजदीक ही गोबिन्द सागर पर,कहीं पर केंद्र सरकार द्वारा पुल निर्मित किया जाएगा जबकि रेलवे लाईन के लिए भी पुल का निर्माण होगा | इसलिए अब हिमाचल सरकार इस बेरी दाड़ोला पुल का निर्माण नहीं करेगी |
गोबिन्द सागर घाट सुधार सभा द्वारा मांगी गई सूचना के अधिकार के नीचे प्राप्त सूचना में बताया गया है कि यदि अभी तक भी इस अवधि में निर्माण नहीं हो पाया है ,तो इसके लिए प्रशासनिक अनुमोदन व व्यय स्वीकृति प्राप्त न होना ही मुख्य कारण है |
इस सबसे स्पष्ट प्र्माणित होता है कि अब वर्ष 2019 में सत्ता में आई भाजपा की जयराम ठाकुर नेत्रत्व वाली सरकार भी इस पुल निर्माण के प्रति उदासीन बनी हुई है और लाखों भाखड़ा विस्थापितों की यह महत्वपूर्ण मांग रद्दी कि टोकरी में डाल दी गई है जबकि इस पुल निर्माण पर अब तक हिमाचल सरकार अथवा जनता के गाढ़े खून पसीने की कमाई का 32 लाख 19 हजार रुपए व्यय कर चुकी है | गोबिन्द सागर घाट सुधार सभा ने हिमाचल सरकार से मांग की है कि उस पुल का निर्माण तुरंत आरंभ करने के कड़े आदेश दिये जाए |

