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अंतरिक्ष में 300 किलोमीटर की दूरी तक सेटेलाइट को मार गिराने का सफल परीक्षण

Byjanadmin

Mar 27, 2019

इस कार्य को अंजाम देने के लिए प्रधानमंत्री व केंद्र सरकार को बधाई

जनवक्ता डेस्क, बिलासपुर
अभी तक अब तक अंतरिक्ष में मार करने की शक्ति केवल अमेरिका, रूस और चीन के पास ही थी, लेकिन अब भारत भी इस ताकतवर सूची में शामिल हो गया है.घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र के विधायक राजेंद्र गर्ग, मीडिया प्रभारी महेंद्र पाल रतवान , मंडल अध्यक्ष नरेंद्र ठाकुर, मंडल महासचिव जोरावर सिंह, सुरेश ठाकुर, जिला उपाध्यक्ष नवीन शर्मा, महिला मोर्चा अध्यक्ष सुषमा रनौत, उषा ठाकुर, धनीराम सोंखला , राकेश चोपड़ा, पुरुषोत्तम शर्मा, राजेश शर्मा, हेमराज संख्यान ,इत्यादि अनेक भाजपा कार्यकर्ताओं ने, सफल परीक्षण कर इस कार्य को अंजाम देने के लिए, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्र सरकार को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा, विकास की दृष्टि से नित नए आयाम स्थापित करने के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में, देश की सुरक्षा को और पुख्ता करने की दृष्टि से किया गया, इस उपलब्धि के साथ भारत विश्व का चौथा देश बन चुका है। इससे पूर्व अमेरिका, चीन, और रूस ही इस तरह के कार्य को अंजाम दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि आज का दिन देश के लिए बहुत गौरव का दिन है,इससे पूर्व भी देश के प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में, भारत ने ना केवल पाकिस्तान में घुसकर एयर स्ट्राइक की थी, बल्कि वहां आतंकियों के अड्डो को ध्वस्त किया गया था। उन्होंने कहा कि इन सब कार्यों को अंजाम करने से यह स्वयं सिद्ध होता है किस देश के प्रधानमंत्री का सीना 56 इंच का है।
उन्होंने कहा कि भारत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अंतरिक्ष में मार करने वाली एंटी सैटेलाइट मिसाइल का सफल इस्तेकमाल किया। खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने यह घोषणा राष्ट्रस के नाम संबोधन में की. इस उपब्धि के साथ ही भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश बन गया है, जिसके पास अंतरिक्ष में मार करने वाले मिसाइल की तकनीक हासिल है। अभी तक अब तक अंतरिक्ष में मार करने की शक्ति केवल अमेरिका, रूस और चीन के पास ही थी, लेकिन अब भारत भी इस ताकतवर सूची में शामिल हो गया है।

क्या होता है एंटी सैटेलाइट हथियार

बता दें कि एंटी सैटेलाइट हथियार (ASAT) अंतरिक्ष हथियार हैं, जो सामरिक सैन्य उद्देश्यों के लिए उपग्रहों को निष्क्रिय करने या नष्ट करने के लिए तैयार किया जाता है. भारत ये पहले यह सिस्टहम केवल अमेरिका, रूस और चीन के पास ही था. हालांकि किसी भी देश द्वारा युद्ध में ASAT प्रणाली का इस्ते माल नहीं किया है. कई देशों ने अपने ASAT क्षमताओं को बल के प्रदर्शन में प्रदर्शित करने के लिए केवल अपने दोषपूर्ण उपग्रहों को इसके जरिए नष्टं किया है. इस तरह 27 मार्च 2019 को भारत इस विशेष क्लब में एंट्री करने वाला नया देश बना है.
अमेरिका ने वर्ष 1950 में WAS-199A नाम से रणनीतिक रूप से अहम मिसाइल परियोजनाओं की एक श्रृंखला की शुरुआत की थी. उसने 26 मई 1958 से लेकर 13 अक्टूबर 1959 के बीच 12 परीक्षण किए थे, लेकिन इन सभी में उसे नाकामयाबी हासिल हुई. हालांकि 21 फरवरी 2008 को अमेरिकी डिस्ट्रॉयर जहाज ने RIM-161 मिसाइल के जरिये अंतरिक्ष में यूएसए 153 नाम के एक जासूसी उपग्रह को मार गिराया था. इस तरह उसे यह उपलब्धि हासिल हुई.
वहीं, माना जाता है कि रूस ने शीत युद्ध के दौरान अमेरिकी बढ़त को कम करने के लिए वर्ष 1956 में सर्गेई कोरोलेव ने ओकेबी-1 नाम की मिसाइल पर काम करना शुरू किया था. इसके पश्चाओत रूस के इस मिसाइल कार्यक्रम को ख्रुश्चेव ने आगे बढ़ाया. रूस ने UR-200 रॉकेट के निर्माण कार्य शुरू किया. रूस ने मार्च 1961 में इस्ट्रेबिटेल स्पूतनिक के रूप में अपने फाइटर सैटेलाइट कार्यक्रम की शुरूआत की थी. रूस ने फरवरी 1970 में दुनिया का पहला सफल इंटरसेप्ट मिसाइल का सफल परीक्षण किया था. हालांकि बाद में रूस ने इस कार्यक्रम को बंद कर दिया था, लेकिन अमेरिका द्वारा फिर से परीक्षण शुरू करने के बाद 1976 में रूस ने अपनी बंद परियोजना को फिर से शुरू कर दिया गया.
उधर, भारत के पड़ोसी देश चीन ने ने 11 जनवरी 2007 को अपने खराब पड़े मौसम उपग्रह को मारकर इस क्लब में प्रवेश किया था.

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