कथा में प्रवचनों की अमृतवर्षा कर रहे पंडित सुरेश भारद्वाज
जनवक्ता डेस्क, बिलासपुर
श्री नयना देवी जी के खरकड़ी में बुधवार से श्रीमद भागवत कथा का शुभारंभ हो गया। खरकड़ी पंचायत घर के साथ हो रहे इस सार्वजनिक आयोजन को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह है। श्रीमद भागवत कथा ग्रंथ को सादर भव्य कलश यात्रा के माध्यम से आयोजन स्थल तक लाया गया। बैंड बाजे, ढोल नगाढ़ों की धुनों पर ग्रामीणों ने इस शोभायात्रा में भाग लिया। व्यास पीठ पर श्रीमद भागवत कथा ग्रंथ को विधिवत मंत्रोच्चारण के साथ प्रतिष्ठापित किया गया। पहले दिन प्रवचनों की अमृतवर्षा करते हुए पंडित सुरेश भारद्वाज ने कहा कि भगवान नाम शब्द का उच्चारण भी यदि कोई प्राणी कर लेता है तो भी उसे उसके पापों से मुक्ति मिल जाती है। उन्होंने कहा कि आग का काम जलाना है कोई व्यक्ति यदि आग जाने-अनजाने में छू लेता है तो एकदम उसे जलन का अहसास होता है। भगवान का नाम भी इसी तरह से है यदि कोई गाहे-बगाहे भगवान के नाम का सिमरन करता है तो भगवान उसे अवश्य फल देते हैं। उन्होंने कहा कि अजामिल ने अपने जीवन में अनगिनत पाप किए थे लेकिन मृत्यु के समय उसके मुंह से केवल नारायण-नारायण शब्द निकले। इसी उच्चारण के साथ भगवान ने उसे अपने चरणों में शरण दी तथा उसके सकल कलेश कट गए और अजामिल का उद्धार हुआ। उन्होंने कहा कि पापों का सबसे बड़ा प्रायश्चित है कि वह भगवान के नाम का उच्चारण करें। उन्होंने बताया कि भगवान के नाम से मनुष्य की बुद्धि, भगवान के गुण, नाम, लीला और स्वरूप में रम जाती है। भगवान के प्रति मानव की आत्मीय बुद्धि हो जाती है। उन्होंने कहा कि जीव गिरते, उठते, बैठते या हंसी मजाक में भी जब हरि-हरि कहकर पुकारता है तो भी प्रभु उसका फल उसे देते हैं। कथा समापन पर आयोजकों की ओर से प्रसाद वितरण कार्यक्रम भी किया गया।

