दिग्गजों की आनाकानी के बीच नए चेहरों को तरजीह देने की कवायद शुरू
सुखविंदर सुक्खु पर सहमति बनने के आसार
इंदर दत्त लखनपाल, सतपाल रायजादा, सुनील बिट्टू, तेजस्वी शर्मा व धर्मेंद्र पटियाल भी चर्चा में
जनवक्ता डेस्क बिलासपुर
लोकसभा चुनावों के चलते हिमाचल प्रदेश की अति महत्वपूर्ण माने जाने वाली लोकसभा सीट हमीरपुर पर पेच फंसता नजर आ रहा है । इस सीट पर दिग्गजों द्वारा चुनाव लड़ने से मना कर देने के बाद नए समीकरण उभर कर सामने आ रहे हैं। हालांकि कांग्रेस पार्टी के लोकप्रिय अध्यक्ष रहे सुखविंदर सुक्खु को इस सीट के लिए मजबूत प्रत्याशी माना जा रहा है। लेकिन अगर सुखविंदर सुक्खु के नाम पर सहमति नहीं बनती है तो पार्टी हाईकमान संगठन से जुड़े नए चेहरों को भी तरजीह देने की सोच रहा है। सूत्रों के हवाले से पता चला है कि संगठन के लोगों को इसमें प्रमुखता देने की बात चर्चा में है । हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस हाईकमान ने जहां युवाओं को प्राथमिकता देते हुए मंडी से आश्रय शर्मा को चुनाव में उतारा है वहीं अनुभवी और वरिष्ठ नेताओं का भी ध्यान रखा गया है। शिमला लोकसभा सीट से कर्नल धनीराम शांडिल पार्टी ने प्रत्याशी बनाए हैं। हमीरपुर सीट को भाजपा के अनुराग ठाकुर के कारण महत्वपूर्ण माना जा रहा है और पिछले 15 वर्षों से लगातार सांसद रहने के बाद कांग्रेस पार्टी इस सीट पर मजबूत प्रत्याशी देना चाहती है। अगर सुखविंदर सुक्खु के नाम पर सहमति नहीं बनती है तो हमीरपुर से दो बार विधायक रहे इंद्रदत्त लखन पाल, उना से पहली बार चुनकर आए विधायक सतपाल रायजादा, कांग्रेस के अध्यक्ष रहे सुनील बिट्टू, पूर्व सैनिक कांग्रेस संगठन से जुड़े धर्मेंद्र पटियाल व लगातार छह बार जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे तेजस्वी शर्मा का नाम भी चर्चा में है। जहां तक विधायक इंद्रदत्त लखन पाल की बात है उन्हें हमीरपुर जिले का प्रभावी नेता माना जाता है। वही सतपाल रायजादा ने भाजपा के स्तंभ तथा प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती को हराकर विधानसभा में प्रवेश किया है। वही सुनील बिट्टू को पूर्व कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सुखी का करीबी माना जाता है। धर्मेंद्र पटियाल जहां पूर्व सैनिकों में लोकप्रिय हैं वही एक सच्चे पक्के सिपाही भी है और उन्होंने सेना में महत्वपूर्ण सेवाएं दी हैं। एडवोकेट तेजस्वी शर्मा अपने प्रोफेशन के साथ साथ विभिन्न सामाजिक संस्थाओं में सक्रिय तो है ही लेकिन कांग्रेस के विभिन्न पदों पर उन्होंने बखूबी कार्यभार संभाला है। अब देखना यह है कि ऊंट किस करवट बैठता है।

