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प्राकृतिक कृषि राज्य बनकर उभरेगा हिमाचल : राज्यपाल

Byjanadmin

Jun 5, 2019

पालमपुर में प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ

जनवक्ता डेस्क, बिलासपुर
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि प्रदेश सरकार के प्रयासों से राज्य शीघ्र ही प्राकृतिक कृषि प्रदेश बनकर उभरेगा और दूसरे राज्यों के लिए भी एक आदर्श स्थापित करेगा। राज्यपाल बुधवार को चौधरी सरवन कुमार कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर में कृषि विभाग द्वारा आयोजित प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के अंतर्गत सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती के 6 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के शुभारंभ अवसर पर बोल रहे थे। आचार्य देवव्रत ने कहा कि राज्य में पिछले तीन वर्ष पूर्व प्राकृतिक खेती को लेकर जो चर्चा आरम्भ हुई थी और जिसे मैंने अभियान के रूप में प्रदेश में आरम्भ किया था आज वह कृषि पद्धति फलीभूत होती नज़र आ रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर को बधाई देते हुए कहा कि सरकार ने इस कार्यक्रम में पूरी रुचि लेते हुए इसे मिशन के रूप में लिया है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती को अपनाने का आह्वान किया तथा कहा कि इसे मिशन के रूप में अपनाकर कृषि क्षेत्र में यह पहाड़ी प्रदेश देश के लिए आदर्श स्थापित कर सकता है। उन्होंने कहा कि अनुसंधान से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन के कारणों में 40 प्रतिशत वर्तमान कृषि पद्धति और कृषि उपकरण शामिल है। उन्होंने कहा कि किसान प्राकृतिक खेती को अपनाएं, जिससे फसल उत्पादन में किसी प्रकार की कमी नही आती बल्कि फसल की उत्पादन लागत लगभग शून्य हो जाती है और किसानों को उत्पादों के मूल्य भी अन्य उत्पादों से अधिक मिलते हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती भाग्य बदलने वाली और जीवन मं खुशहाली लाने वाली खेती है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से किसानों की आय को दोगुना किया जा सकता है। राज्यपाल ने प्रशिक्षण शिविर में आये किसानों से ईमानदारी से प्राकृतिक कृषि की जानकारी हासिल कर प्रत्येक किसान के माध्यम से एक पंचायत के किसानों को प्रशिक्षित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में देशी नस्ल की गायों के संरक्षण के लिये पशुपालन विभाग द्वारा पशुपालकों को उच्च कोटी के देशी सीमन उपलब्ध करवाये जाएंगे। 5 से 10 जून तक आयोजित होने वाले इस प्रशिक्षरण शिविर में हिमाचल के किसान और कृषि अधिकारी तथा अन्य राज्यों के किसान भाग ले रहे हैं। इससे पूर्व, कृषि मंत्री श्री रामलाल मारकण्डा ने प्रशिक्षण शिविर में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित होने के लिए राज्यपाल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक कृषि पर विशेष बल दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने अपने पहले बजट में ही इस कृषि के विस्तार के लिए 25 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया था। इसके पश्चात, प्रदेश भर में गत डेढ़ वर्षों से प्राकृतिक कृषि को लेकर अनेक शिविर और सम्मेलन आयोजित किए गए हैं ताकि किसानों को इसका पूर्ण लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2022 तक प्रदेश को प्राकृतिक कृषि राज्य बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसे निश्चित तौर पर पूरा किया जाएगा। पद्मश्री तथा प्राकृतिक कृषि के जनक डॉ. सुभाष पालेकर ने भी इस अवसर पर इस कृषि पद्धति की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने प्रदेश सरकार की इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना भी की। कृषि विभाग के प्रधान सचिव ओंकार शर्मा ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा प्रशिक्षण शिविर की विस्तृत जानकारी दी।

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