
जनवक्ता डेस्क, बिलासपुर
भाजपा ने राज्य स्तर पर पूर्व प्रधान मंत्री श्रीमति इंदिरा गांधी द्वारा वर्ष 1975 में देश पर थोपे गए आपात काल की घोषणा वाले दिन 25 जून को सारे देश भर में “ काला दिवस “ घोषित करते हुए देश के लोगों को लोकतन्त्र के लाभों का स्मरण कराते हुए और प्रत्यक्ष तथा परोक्ष रूप से इसी कारण से कांग्रेस पार्टी की छवि को धूमिल करने और इस दिवस का राजनैतिक लाभ उठाने की पूरे ज़ोर शोर से कोशिश की थी ।इसी प्रयास में इस दिवस को प्रदेश स्तर पर बिलासपुर नगर में मनाने का नेत्रत्व तब विरोध पक्ष में बैठे भाजपा नेताओं ने इस लिए भी किया था , क्यूँ कि बिलासपुर जिला एक मात्र ऐसा जिला था जिससे उस आपात काल में जेलों में विभिन्न अवधियाँ बिताने वाले सबसे अधिक “ लोकतन्त्र सेनानी “ थे,जिन्होने आपातकाल का तब तक डट कर सरेआम विरोध किया था जब तक 19 मास के बाद आपातकाल समाप्त नहीं हो गया ।बिलासपुर के इस राज्य स्तरीय समारोह में तब केंद्र में एक महत्वपूर्ण ब्यापार मंत्री के पद पर नियुक्त और अब केंद्र में वित्त मंत्री के पद पर कार्य कर रही भाजपा की वरिष्ठ नेता श्रीमति निर्मला सीता रमन मुख्यातिथि के रूप में , इस समारोह में उपस्थित सभी हिमाचल प्रदेश के “ लोकतन्त्र सेनानियों “ को सम्मानित करने के लिए पधारी थी । भाजपा के अन्य प्रमुख नेताओं के अतिरिक्त भाजपा के राज्य अध्यक्ष सतपाल सत्ती , हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के पार्टी प्रभारी संजय कटवाल और पार्टी के राज्य प्रमुख प्रवक्ता रणधीर शर्मा भी इस अवसर पर उपस्थित थे ।
समारोह में मुख्यातिथि निर्मला सीता रमन ने “ मीसा “ मेंटेनेस ऑफ इंटरनल स्क्योरिटी एक्ट “ ( आंतरिक सुरक्षा कानून ) के नीचे गिरफ्तार किए गए वरिष्ठ पत्रकार जयकुमार और वरिष्ठ अधिवक्ता राजेन्द्र हांडा तथा स्वर्गीय लोकतन्त्र सेनानियों के परिजनों को भी सम्मानित किया था । सीता रमन ने आपने सम्बोधन में जहां इस बहाने कांग्रेस पार्टी और उसकी पूर्व प्रधान मंत्री श्रीमति इंदिरा गांधी को एक तानाशाह और सत्ता के लालच में देश में
“ डिक्टेटरशिप “ थोपने का आरोप लगाया था वहीं आपातकाल में इंदिरा की आपातकाल की जेलों की यातनाएं भुगतने वाले “ लोकतन्त्र सेनानियों “ और उनके परिवारों के सदस्यों को उनके इस बलिदान के लिए तथा तानाशाही के उस अंधकार में लोकतन्त्र की ज्वाला को प्रज्वलित रखने के सम्मान स्वरूप स्वतन्त्रता सेनानियों की ही भांति राज्य और केंद्र में भाजपा की सरकार आने पर 20 हज़ार मासिक पेंशन देने की घोषणा की थी ।
किन्तु अब भाजपा के केन्द्रीय सरकार का पाँच वर्ष का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भाजपा दोबारा सत्तासीन हुई है जबकि हिमाचल प्रदेश में भी भाजपा की सरकार बने डेढ़ वर्ष से अधिक समय बीत चुका है । किन्तु अब सत्ता के नशे में चूर भाजपा नेताओं को उन स्वतन्त्रता सेनानियों द्वारा जेल में भुगती यातनाओं की कोई याद तक नहीं आ रही है और लोकतन्त्र सेनानी एक एक करके संसार से ही विदाई लेते जा रहे हैं ।
नैतिकता और राजनैतिक प्रतिबद्धता की मांग है कि भाजपा को लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिवारों के प्रति किया गया अपना वादा पूरा करना चाहिए और उन्हें उनके सम्मान स्वरूप उपयुक्त राजकीय मान्यता देकर तुरंत उचित पेंशन व अन्य लाभ दिये जाने की व्यवस्था करनी चाहिए ।
