रुद्रप्रयाग,। क्षेत्रीय विकास, यात्रा व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा स्थानीय आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्य से द्वितीय चरण में चिरबटिया से गुप्तकाशी मोटरमार्ग को चारधाम सर्किट यात्रा से जोड़ने की मांग को लेकर क्षेत्रवासियों की ओर से एक व्यापक हस्ताक्षर अभियान आयोजित किया गया। यह अभियान भाजपा वरिष्ठ नेता कमलेश उनियाल के संचालन एवं मार्ग-दर्शन में शांतिपूर्ण, अनुशासित और सकारात्मक वातावरण में किया जा रहा है।
बता दें कि चिरबटिया, मयाली, तैला, बड़मा, जखोली, कुड़ी-अदूली, बसुकेदार होते हुए गुप्तकाशी तक जाने वाला यह मार्ग केदारनाथ धाम के लिए एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक यात्रा मार्ग माना जाता है। वर्ष 2013 की भीषण आपदा के दौरान इसी मार्ग ने जीवन रेखा की भूमिका निभाई थी। उस समय सेना, प्रशासन एवं आपदा राहत दलों द्वारा बड़े पैमाने पर इसी मार्ग से रेस्क्यू अभियान संचालित किए गए थे, जिससे हजारों श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों की जान बचाई जा सकी।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि इस मार्ग को चार धाम सर्किट में सम्मिलित किए जाने से वर्तमान यात्रा मार्गों पर पड़ने वाला दबाव कम होगा। श्रद्धालुओं को अधिक सुरक्षित, सुगम एवं सुव्यवस्थित यात्रा सुविधा प्राप्त होगी, साथ ही भविष्य में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन के पास एक मजबूत और भरोसेमंद वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध रहेगा।
यह मार्ग क्षेत्रीय आर्थिक विकास की अपार संभावनाओं से भी जुड़ा हुआ है। चार धाम सर्किट से जुड़ने पर स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। सरकार द्वारा संचालित होमस्टे योजना को बढ़ावा मिलेगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार सृजित होगा। इसके अतिरिक्त होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, टैक्सी एवं अन्य वाहन संचालक, मैकेनिक, पंचर एवं हवा भरने वाले, चाय विक्रेता, छोटे दुकानदार तथा स्थानीय महिलाएं अपने उत्पादों के माध्यम से आत्मनिर्भर बन सकेंगी।
इस अवसर पर भाजपा वरिष्ठ नेता एवं प्रदेश मीडिया प्रभारी कमलेश उनियाल ने कहा कि यह हस्ताक्षर अभियान पूरी तरह जनहित से जुड़ा हुआ है और इसका उद्देश्य सरकार तक क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों और भावनाओं को पहुंचाना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार जनभावनाओं को समझते हुए इस ऐतिहासिक, रणनीतिक और विकासोन्मुख मार्ग के संबंध में शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी। हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से यह भी स्पष्ट किया गया कि यह पहल किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सामूहिक सोच और साझा भविष्य से जुड़ी हुई है। यह प्रयास सुरक्षित यात्रा, स्थानीय विकास, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में एक सार्थक एवं दूरदर्शी कदम है।
