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हिमाचली संस्कृति के ध्वज विजय चौहान नहीं रहे

Byjanadmin

Sep 25, 2018

लुहणू घाट स्थित मोक्ष धाम में किया गया अंतिम संस्कार
हजारों की संख्या में लोगों ने उन्हें किए श्रद्धासुमन अर्पित

बिलासपुर
हिमाचल के हर सांस्कृतिक मंच पर अपनी अलग पहचान रखने वाले कलाकार विजय चौहान को मंगलवार को अंतिम विदाई दे दी गई। वह परिवार जनों और कई चाहने वालों को बिलखता छोड़ इस संसार से विदा हुए। वे कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। मंगलवार को लुहणू घाट पर स्थित मोक्ष धाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस अवसर पर हजारों की संख्या में लोगों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। नगर के डियारा सेक्टर के स्थानीय निवासी विजय चौहान पूरे प्रदेश में किसी पहचान के मोहताज नहीं थे। स्कूल स्तर से लेकर कालेज तथा गैर छात्र युवा उत्सवों में अपनी कला का प्रदर्शन करने वाले विजय चौहान का नाम कला की दुनिया में शिद्दत से लिया जाता रहा है। परिवार में सबसे छोटे सदस्य होने के कारण वह सभी के लाडले थे। हालांकि इनके पिता स्वर्गीय संत राम चौहान ऐतिहासिक श्री राम नाटक के अहम स्तंभ थे, जबकि पूरे परिवार के सदस्य किसी न किसी रूप से श्री राम नाटक की सेवा करते आए हैं लेकिन विजय चौहान की अदाकारी आज भी दर्शकों के आं ाों में जीवंत है। इनके द्वारा निभाए गए किरदार आज भी याद किए जाते हैं। श्री राम नाटक समिति के प्रधान नरेंद्र पंडित व अन्य पदाधिकारियों विजय चौहान के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि बिलासपुर ने एक महान कलाकार खो दिया है। समाज के लिए यह एक अपूर्णीय क्षति है। समिति के सदस्यों ने विजय चौहान की आत्मा की शांति की कामना ईश्वर से की है। उधर सदर के विधायक सुभाष ठाकुर घुमारवीं के विधायक राजेंद्र गर्ग, झंडूत्ता के विधायक जीतराम कटवाल, नयनादेवी के विधायक रामलाल ठाकुर के अलावा पूर्व सांसद सुरेश चंदेल ने भी इस युवा के निधन पर शोक जताया है और शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी है।

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