
जनवक्ता ब्यूरो, बिलासपुर
शून्य लागत प्राकृतिक खेती किसानों की आर्थिकी को मजबूत कि लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह बात अध्यक्ष आतमा योजना एवं उपायुक्त विवेक भाटिया ने चैधरी श्रवण कुमार कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में 30 सितम्बर से 5 अक्तूबर तक शून्य लागत प्राकृतिक खेती पर आधारित 6 दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त कर वापिस लौटे 64 किसानों के लिए घुमारवीं में आयोजित कार्यक्रम में कही। इस अवसर पर उपायुक्त ने प्रशिक्षण प्राप्त कर वापिस आए किसान महिला एवं पुरूषों के साथ शून्य लागत प्राकृतिक खेती के विभिन्न मुख्य बिन्दुओं पर चर्चा की।
उन्होंने कृषकों को आहवान करते हुए कहा कि खेत चाहे छोटा हो या बड़ा भावना बड़ी होनी चाहिए यह इच्छा लेकर किसान शून्य लागत प्राकृतिक खेती को आरम्भ करें।

उन्होंने कहा कि इस खेती को धरातल के ऊपर लाकर स्वयं के खेतो में शून्य लागत आधारित खेतो के प्रदर्शन माॅडलों को आगामी रवि सीज़न में लगाए ताकि जिला बिलासपुर को शून्य लागत प्राकृतिक खेती के माॅडल के रूप विकसित किया जा सके। उन्होंने आतमा योजना में कार्यरत बी.टी.एम और ए.टी.एम को भी सुझाव दिया की इन कृषकों के खेते में जाकर ली जानी वाली फसलों की जानकारी लें।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त कृषकों का व्ह्टसएप ग्रुप बनाना भी सुनिश्चित करें ताकि आपस में उनका निरंतर सम्पर्क बना रहे। उन्होंने कहा कि ब्लाॅक स्तर पर भी एक संगठन बनाए ताकि जिला स्तर पर शून्य लागत प्राकृतिक खेती करने वालों की पहचान की जा सके।
उन्होंने शून्य लागत प्राकृतिक खेती के महत्व को समझते हुए कहा कि देसी गाय जो सड़कों पर बेसहारा है उन्हें पशु पालन विभाग के माध्यम से स्वस्थ्य देसी गाओं की पहचान करवाई जाएगी और इच्छुक किसानों को यह गाय उपलब्ध करवाई जाएगी ताकि किसान इस खेती के लिए आवश्यक गोबर, गोमूत्र से जीवामृत, धनजीवामृत तथा बीजामृत का निर्माण अपने खेतों में कर सके।

इस अवसर पर एस.डी.एम घुमारवीं शशिपाल शर्मा, उप परियोजना निदेशक आतमा देश राज शर्मा, बी.डी.ओ घुमारवीं जीत राम, एस.एम.एस घुमारवीं रवि शर्मा, एस.एम.एस झंडूता अशोक चंदेल, ए.डी.ओ घुमारवीं देव राज भारद्वाज उपस्थित रहे।

