विधानसभा में अपने तारांकित प्रश्न के माध्यम से पूछा
क्या सरकार/विभाग के कर्मचारी है पंचायत चौकीदार
जनवक्ता डेस्क बिलासपुर
सदर विधायक सुभाष ठाकुर ने विधानसभा में अपने तारांकित प्रश्न के माध्यम से पूछा कि प्रदेश में सीमेंट का उत्पादन होने के बावजूद दूसरे राज्यों की तुलना में यहां सीमेंट महंगे दामों में बिकता है, और यदि हां, तो सरकार प्रदेश में सीमेंट सस्ता करने का विचार रखती है। तारांकित प्रश्न का जबाव देते हुए उद्योग, श्रम एवं रोजगार, तकनीकी शिक्षा तथा व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री विक्रम सिंह ने कहा कि प्रदेश में स्थित विभिन्न सीमेंट कम्पनियों द्वारा खुले बाज़ार में सीमेंट के रेट अपने स्तर पर निर्धारित किए जाते हैं, क्योंकि सीमेंट एक अनियंत्रित मद है। भारत सरकार की अधिसूचना संख्याः एस आ-168(ई), दिनांक 1 मार्च, 1989 एवं राज्य सरकार की अधिसूचना संख्या एफडीएस-ए (3)-6/82, दिनांक 16 जनवरी, 1991 द्वारा सीमेंट के वितरण एवं मूल्य निर्धारण के नियन्त्रण को समाप्त किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में विभिन्न सीमेंट कम्पनियों द्वारा रेट मांग एवं पूर्ति के आधार पर निर्धारित किए जाते हैं। हिमाचल प्रदेश में पड़ोसी राज्य की तुलना में सीमेंट थोड़ा मंहगा मिलता है फिर भी सरकार द्वारा समय-2 पर उक्त सीमेंट कम्पनियों के साथ बैठक बुलाकर उन्हें खुले बाजार में सीमेंट के रेट कम करने के निर्देश दिए जाते हैं तथा उक्त कम्पनियों के प्रतिनिधियों ने बैठकों में खुले बाज़ार में सीमेंट के रेट अधिक होने के यह कारण हैं कि हिमाचल प्रदेश में अधिक माल भाड़ा होना तथा प्रदेश में कम सीमेंट कम्पनियों का होना और प्रदेश में सीमेंट के प्रति बैग पर एजीटी/सीजीसीआर कर लागू होना। प्रदेश में कितने पंचायत चौकीदार कार्यरत है, जिलावार ब्यौरा दें, पंचायत चौकीदार क्या सरकार/विभाग के कर्मचारी है, सरकार इनको कितने वर्ष बाद अंशकालिक से पूर्णकालिक व कितने वर्ष बाद दैनिक वेतन भोगी बनाती है, ब्यौरा दें, और सरकार आर एण्ड पी नियम बनाकर इनको नियमित करने पर विचार रखती है। तारांकित प्रश्न का जबाव देते हुए ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री वीरेन्द्र कंवर ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न जिलों में 3212 पंचायत चौकीदार जिनमें बिलासपुर 151, चम्बा 283, हमीरपुर 229, कांगडा 748, किन्नौर 65, कुल्लू 204, लाहौल स्पिति 41, मण्डी 469, शिमला 359, सिरमौर 228, सोलन 211 तथा ऊना में 224 कार्यरत है। उन्होंने बताया कि पंचायत चौकीदार सरकार/विभाग के कर्मचारी नहीं है। सरकार इनको कितने वर्ष बाद अंशकालिक से पूर्णकालिक व कितने वर्ष बाद दैनिक वेतन भोगी बनाती है के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों को इस संबन्ध में कोई निर्देश नहीं दिए गए है। उन्होंने बताया कि पंचायत चौकीदार के आर एण्ड पी नियम बनाकर इन्हें नियमित करने की कोई प्रस्तावना राज्य सरकार के विचाराधीन नहीं है।

