हिमाचल प्रदेश में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा घोषित किया जाए
सोलन
हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी, शिमला द्वारा आज उपायुक्त कार्यालय सोलन के सभागर में आचार्य दिवाकर दत्त शर्मा की जयंती पर राज्य स्तरीय समारोह आयोजित किया गया। समारोह की अध्यक्षता संस्कृत भारती के प्रान्त संगठन मंत्री नरेंद्र ने की।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा घोषित किया जाए क्योंकि संस्कृत एक वैज्ञानिक, व्यावहारिक, कंप्यूटर के लिए सर्वथा उपयुक्त और प्राचीनतम भाषा है। विश्व के प्राचीनतम ग्रन्थ वेद संस्कृत में हैं। संस्कृत में धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष, ज्ञान, विज्ञान, योग, उपासना, आध्यात्म आदि समस्त विषय संस्कृत में लिखित हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विश्व के अनेक विश्वविद्यालयों में संस्कृत का पठन-पाठन हो रहा है।
समारोह में संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया। डॉ. कृष्ण मोहन पाण्डेय ने स्वतंत्रता संग्रामकालीन संस्कृत साहित्य और डॉ. विवेक शर्मा ने वेदों में राष्ट्र चिंतन तथा डॉ. ओंकार चंद ने संस्कृत साहित्य में राष्ट्रवाद विषयों पर शोधपत्र प्रस्तुत किए।

संस्कृत शोध संस्थान के निदेशक केशव शर्मा ने आचार्य दिवाकर दत्त शर्मा के संस्कृत और संस्कृति पर विशिष्ट योगदान का उल्लेख किया। संस्कृत भाषा, साहित्य के विद्वान आचार्य रामानंद, डॉ. कुमार सिंह, डॉ. प्रवीण विमल, डॉ. हरिदत्त, डॉ. मनसा राम शर्मा, मदन हिमाचली, डॉ. ओमप्रकाश, डॉ. शंकर वशिष्ठ, प्रो. हरिदत्त शर्मा, डॉ. रणजीत आदि विद्वानों ने परिचर्चा में भाग लिया तथा अपनी रचानाओं का पाठ किया।
द्वितीय सत्र डॉ. भक्तवत्सलम की अध्यक्षता में संस्कृत कवि सम्मेलन के रूप में आयोजित किया गया। सम्मेलन में जगत राम शास्त्री, देवेंद्र शास्त्री, डॉ. प्रेमलाल गौतम, डॉ. अरूण शर्मा, उमा दत्त, डॉ. केशवानंद कौशल ने कविता पाठ किया। इस अवसर पर डॉ. भक्तवत्सलम ने कहा कि आचार्य दिवाकर दत्त शर्मा का ज्योतिष, कर्मकाण्ड, आयुर्वेद तथा संस्कृत साहित्य में पत्रकार, संपादक तथा प्रकाशक के तौर पर विशेष योगदान रहा है।
हिमाचल अकादमी के सचिव डॉ. कर्म सिंह ने सम्मेलन के प्रारंभ में कहा कि अकादमी प्रदेश की पारंपरिक समकालीन लोक संस्कृति, कला, भाषा व साहित्य के क्षेत्र में विभिन्न योजनाओं का संचालन कर रही है जिसमें संस्कृत पत्रिका श्यामला का प्रकाशन महत्वपूर्ण है।

संस्कृत सम्मेलन में सोलन के स्थानीय विद्यालयों से गीता आदर्श विद्यालय, सनातन धर्म विद्यालय, दयानंद आदर्श विद्यालय कण्डाघाट, राजकीय छात्रा वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ओच्छघाट, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कोठी देवरा, एमआर डीएवी आदि पाठशालाओं के छात्र-छात्राओं ने संस्कृत श्लोकोच्चारण, वेद मंत्र पाठ तथा संस्कृत गीतिका इत्यादि पर भव्य कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम में आचार्य दिवाकर दत्त शर्मा के सुपुत्र सत्यव्रत शर्मा, सुपुत्री डॉ. करूणा और दोहित्र विट्ठल गौतम सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
इस अवसर पर प्रख्यात संस्कृत विद्वान प्रो. केशव राम शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति, योगविद्या, अध्यात्म तथा संस्कृत साहित्य भंडार के कारण भारत विश्व गुरू रहा। वर्तमान में भी विश्व समुदाय, संस्कृत, संस्कृति और अध्यात्म को भारत से ग्रहण कर रहा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की पावन देवभूमि में वेदों, पुराणों तथा संस्कृत साहित्य की रचना हुई। यहां अनेक ऋषि मुनि देवी-देवताओं के रूप में पूजित हैं। इस परंपरा में जिन अनेकों आचार्यों ने लेखन के माध्यम से हिमाचल को राष्ट्रीय स्तर पर गौरव प्रदान किया है उनमें आचार्य दिवाकर शर्मा का नाम सर्वोपरि है। आचार्य का योगदान तथा आदर्श जीवन संस्कृत तथा संस्कृति प्रेमियों के लिए सदैव प्रेरणास्त्रोत बना रहेगा।

