लेखक निशीथ जोशी
पूर्व संपादक अमर उजाला दिल्ली
माफ करें पर कहना जरूरी है………….
जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में बाई पास तिराहे से गुजर रही सुरक्षा टीम के साथ सड़क बना रही टीम की सुरक्षा में तैनात सेना के जवान राजेन्द्र सिंह को पत्थरबाजों में मार डाला। पथराव कर रहे लोगों का फेंका पत्थर जवान राजेन्द्र सिंह के सिर पर लगा। उनको अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी मौत हो गई। माफ करें पर कहना जरूरी है। जितने भी खुद को प्रगतिशील कहने वाले लोग हैं, जरा सी घटना पर सोशल मीडिया पर बतंगड़ बना देते हैं। जाति, धर्म, रणनीति और घृणा की आग लगाने के प्रयास करते हैं। सब चुप हैं। कारण एक फौजी शहीद हुआ है। अगर धर्म, जाति आदि का मसाला मिलता तो स्वार्थ सधता। खैर, उनको भी मानना और समझना पड़ेगा कि वह,उनका परिवार और उनके घर , व्यवसाय इसीलिए सुरक्षित हैं क्योंकि जवान राजेन्द्र सिंह जैसे मातृ भूमि पर कुर्बान होने का जज्बा लिए हमारे फौजी और सुरक्षा बलों के वीर सपूत सीमा पर दुश्मनों और उनकी साजिश से हमारी रक्षा करने को शहीद होने तैयार रहते हैं। आप सब शहीदों और सीमा सहित देश के अलग अलग हिस्सों में राष्ट्र और हमारी रक्षा के लिए तैनात फौजियों और सुरक्षा बलों पुलिस के कर्मियों को हमारा शत शत नमन। मानवाधकारवादियों को भी देखना होगा। पत्थरबाज जो आतंकियों, देशद्रोहियों, पाकिस्तान द्वारा भेजे गए हमलावर अतांकियों के सहायक बन चुके हैं उनके और आतंकियों में क्या फर्क बचता है। एक बार पत्थरबाजों का जड़ से सफाया जरूरी है। महबूबा मुफ्ती के दबाव में आई केंद्र सरकार उनको रिहा कर गलती कर चुकी है। क्यों ना उसे भी इस शहादत का दोषी माना जाए। पंजाब का उदाहरण हमारे सामने है। एक बार बेअंत सिंह जैसे राजनेता और के पी एस गिल जैसे जाबांज पुलिस ऑफिसर की जरूरत कश्मीर को है। जिस दिन कोई भी केंद्र सरकार यह कर सकी, कश्मीर में शांति के साथ कश्मीरी पंडितों की वापसी भी संभव हो जाएगी। वर्तमान में चीन से सीखने की जरूरत है। सुरक्षा के मामले में कोई रियायत नहीं। या फिर जोरावर सिंह जिसने कशमीर में विजय के बाद क्या किया था के इतिहास को जानें। वरना मोदी सरकार को भी काग्रेस सरकार की तरह जानता कश्मीर मसले का हल ना निकाल पाने का दोषी ही मानेगी ।

