रोहड़ू में आयोजित टी-20 क्रिकेट मैच के समापन समारोह में हुए उपस्थित
जनवक्ता डेस्क बिलासपुर
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि नशा एक सामाजिक बुराई है और इसके खिलाफ हम सबको मिलकर लड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि खेलों के माध्यम से युवाओं में जागृति लाकर नशे के खिलाफ माहौल तैयार करने की आवश्यकता है।
राज्यपाल आज शिमला जिले के उपमण्डल रोहड़ू में आयोजित टी-20 क्रिकेट प्रतियोगिता के समापन अवसर पर बोल रहे थे। प्रतियोगिता का आयोजन हिमाचल प्रदेश खेल, सांस्कृतिक एवं पर्यावरण संघ द्वारा किया गया था। इस प्रतियोगिता के लिए संघ द्वारा नारा दिया गया था-‘‘आओ नशा छोड़ें-खेल खेलें’’।
इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि खेलों के माध्यम से नशे के खिलाफ जो अभियान चलाया गया है, उसके लिए संघ बधाई का पात्र है। उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा न मिले तो वह गलत रास्ते का चयन कर सकता है। उन्होंने खेद जताया कि देव भूमि भी नशे जैसी सामाजिक बुराई से अछूती नहीं रही है और यहां पर भी नशे जैसे गैर कानूनी कार्यों में लोग संलग्न पाए जाते हैं। इससे समाज को बचाने के लिए खेलों के माध्यम से अभियान चलाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार भी नशे के खिलाफ अभियान छेड़े हुए है। यह राजनीतिक मामला नहीं है। नशा हर परिवार को प्रभावित कर सकता है। इसलिए यह हमारा कर्त्तव्य बनता है कि हम इस अभियान का हिस्सा बनें और प्रदेश को नशे से मुक्त करें। उन्होंने कहा कि हमारे सांस्कृतिक मूल्य काफी उन्नत रहे हैं और देव-भूमि में नशे की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि नशा करने वाला व्यक्ति बुद्धिहीन हो जाता है और वह समाज और देश के काम नहीं आ सकता।
इस अवसर पर राज्यपाल ने विजेता टीम को बधाई दी। उन्होंने आशा की कि भविष्य में भी इस तरह के आयोजनों के माध्यम से युवाओं को जागृत किया जाएगा।
इस अवसर पर, पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि खेल मनुष्य के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि आज कुछ युवा नशे की बुराई का शिकार हो रहे हैं। इस तरह की खेल प्रतियोगिताएं इस दिशा में अच्छा कदम है और इससे युवा आगे आकर नशे के खिलाफ माहौल तैयार करने में सहयोग करेंगे।
विधायक एवं हिमाचल प्रदेश खेल, सांस्कृतिक एवं पर्यावरण संघ के अध्यक्ष विक्रमादित्य सिंह ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा कहा कि संघ के माध्यम से अनेक सामाजिक बुराइयों के खिलाफ इस तरह के आयोजन किए जाते हैं, जिनसे सामाजिक चेतना पैदा की जा सके। उन्होंने कहा कि एक माह तक चली इस प्रतियोगिता में करीब 437 टीमें शामिल हुईं और 6000 से अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया। यह एक शुरूआत है और भविष्य में इससे बडे़ स्तर पर आयोजन किए जाएंगे।
राज्यपाल ने इस अवसर पर नशे के विरूद्ध शपथ भी दिलाई।
स्थानीय विधायक मोहन लाल बराक्टा ने राज्यपाल एवं पूर्व मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
इससे पूर्व, राज्यपाल ने जुब्बल की विजेता टीम को ट्रॉफी प्रदान की तथा उप-विजेता कुसुम्पटी की टीम को भी पहले रनर-अप का पुरस्कार प्रदान किया।
पूर्व सांसद श्रीमती प्रतिभा सिंह, विधायक नंद लाल, राज्यपाल के सलाहकार डॉ. शशिकांत शर्मा भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

