नई पेंशन नीति कर्मचारी महासंघ हिमाचल प्रदेश के बैनर तले होगा धरना
जनवक्ता डेस्क बिलासपुर
नई पेंशन नीति कर्मचारी महासंघ हिमाचल प्रदेश के बैनर तले जिला बिलासपुर से कर्मचारी संसद मार्च के लिए नई दिल्ली रवाना होंगे । जिसमें हिमाचल प्रदेश के लगभग सभी विभागों के 10000 कर्मचारी हिस्सा लेंगे यह कर्मचारी केंद्र सरकार द्वारा लागू राष्ट्रीय पेंशन नीति का विरोध कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि नई पेंशन नीति में कर्मचारियों के लिए कुछ भी नहीं है यह पेंशन नीति शेयर बाजार को फायदा देने के लिए बनाई गई है जिसमें कर्मचारियों के वेतन से मूल वेतन व महंगाई भत्ते का 10% हिस्सा काटा जाता है तथा इतना ही हिस्सा प्रदेश सरकार द्वारा भी जोड़कर एनएसडीएल कंपनी के खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है जोकि हिमाचल प्रदेश के करदाताओं का कमाया हुआ धन है जिसे प्राइवेट कंपनी में डालने का प्रदेश सरकार के पास कोई हक नहीं है । सरकारें जनता से देश के विकास के लिए कर इकट्ठा करती हैं परंतु उसे इस तरह गलत नीतियां बनाकर शेयर बाजार में लगाया जाता है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें यह राष्ट्रीय पेंशन नीति स्वीकार नहीं है इसके अंतर्गत जब भी एक कर्मचारी 58 वर्ष की आयु में रिटायर होता है तो उसे रिटायरमेंट के बाद कुछ भी नहीं मिलता तथा कर्मचारी इस पैसे का मात्र 60% उसकी आयु 60 वर्ष होने पर प्राप्त हो पाता है तथा उसे इस पैसे पर भी कर देना पड़ता है जोकि न्याय संगत नहीं है क्योंकि सेवाकाल के दौरान इस पैसे पर कर की गणना हो चुकी होती है । राष्ट्रीय पेंशन नीति में कर्मचारी की पेंशन पूर्ण रूप से बाजार पर निर्भर करती है जिसके अंतर्गत लगभग ₹50000 पर सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी को लगभग ₹1000 ही पेंशन लग जाती है कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने इससे पहले 28 अक्टूबर को प्रत्येक सांसद के आवास या कार्यालय पर 1 दिन का संकेतिक उपवास रखा था जिस पर विभिन्न सांसदों ने उनकी मांग को सरकारों तक पहुंचाने का वादा किया था। सांसदों ने अपनी ओर से प्रदेश के मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री को ज्ञापित भी किया था परंतु अभी तक प्रदेश सरकार द्वारा या केंद्र सरकार द्वारा किसी भी प्रकार का कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है। इस उपलक्ष में राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली मंच (NMOPS) द्वारा केंद्र सरकार को ज्ञापन दिया गया कि यदि केंद्र सरकार शीघ्र अतिशीघ्र पुरानी पेंशन बहाली पर कोई निर्णय नहीं लेते तो 26 नवंबर को नई दिल्ली में जंतर मंतर से संसद भवन तक रोषपूर्ण मार्च किया जाएगा। इसी कारण कर्मचारी दिल्ली में जंतर मंतर पर धरने के लिए जा रहे है।

