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बिलासपुर के रक्तवीर रितिक शर्मा एक बार फिर सम्मानित

Byjanadmin

Dec 30, 2018

लगातार रक्त सेवाओं के लिए मिला एक और नैशनल अवार्ड

कोलकाता एवं पुणे में पहले भी हो चुके है नैशनल अवार्ड से सम्मानित

जनवक्ता डेस्क बिलासपुर
रक्त दान एवं समाजसेवा के क्षेत्र में रितिक शर्मा के योगदान को देखते हुए हरियाणा के रक्तसेवक परिवार द्वारा शाहबाद मार्कण्डेय में आयोजित भव्य कार्यक्रम में सम्मानित किया गया । इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि आइ पी एस ऑफ़िसर एस पी कुरुक्षेत्र सुरेन्द्र पाल सिंह पूर्व विधायक अनिल दाँतोड़ी एस दी एम कुरुक्षेत्र और समाजसेवी सोनू सेठी उपस्थित हुए । कार्यक्रम की अध्यक्षता रक्तसेवक परिवार के अध्यक्ष गगन चंडोक ने की ।
ज्ञात रहे कि रितिक शर्मा को पिछले वर्ष ही रक्तवीर की उपाधि से भी सम्मानित किया गया था । रितिक शर्मा 36 बार रक्त दान कर चुके है , स्वयं रक्तदान के साथ वो पूरे देश में रक्त की कमी पूरा करने में सहायता करते है । इमर्जेन्सी में ख़ून उपलब्ध करवाना हो या ग़रीबों की सहायता हर काम में रितिक शर्मा आगे रहते है । चंडीगढ़ स्थित होमयोपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में पढ़ाई कर रहे रितिक का कहना है कि उन्हें यह प्रेरणा राष्ट्रीय स्वयमसेवक संघ से मिली है । अभी सर्दियों की शुरुआत में ही रितिक शर्मा ने अपने मित्रों के साथ मिलकर ग़रीबों को कम्बल बाँटे थे । फ़्रेंड्ज़ चैरिटी क्लब नाम की संस्था में मित्रों के सहयोग से ही वो इस सब कार्य को करते है । ग़रीब परिवार की बेटियों की शादी में धाम के प्रयोजन के साथ साथ ग़रीब बच्चों की पढ़ाई में भी ये संस्था मदद करती है ।
रितिक का कहना है कि ये सिर्फ़ मित्रों और परिवार के साथ से ही सम्भव है कि आज वो तीन नैशनल अवार्ड प्राप्त कर चुके है । रितिक के पिता डॉक्टर विक्रम शर्मा कृषि के क्षेत्र में नए आयाम प्रदेश में स्थापित कर चुके है और वर्तमान में कॉफ़ी बोर्ड ऑफ़ इंडिया के मनोनीत डायरेक्टर है और रितिक की माता पूर्व में ज़िला परिषद की सदस्य रकेह चुकी हैं। पत्रकारों से बात करते हुए रितिक शर्मा ने कहा की ज़िला बिलासपुर के अस्पताल के साथ-साथ पूरे प्रदेश के अस्पतालों में प्लेट्लेट्स मशीनो की स्थापना करवाना उनकी और उनकी संस्था की मुख्य प्राथमिकता है । उन्होंने प्रदेश सरकार से अनुरोध भी किया है कि अस्पताल प्रशासन को रक्तदानियो की क़द्र करने को कहा जाए। उनका कहना है कि प्रदेश के कुछ अस्पतालों में रक्तदानियो की क़द्र नहीं की जाती है जिस से नए जुड़ने वाले रक्तदाताओं का मनोबल टूट जाता है ।

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