पूर्व मुख्यमंत्री ने बीड़ बगेहड़ा सीनियर सेकेंडरी स्कूल के वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह में होनहार बच्चों को बांटे पुरस्कार
जनवक्ता ब्यूरो, हमीरपुर
शिक्षा के क्षेत्र में क्षेत्र में सुविधाएं बढ़ी है तो साथ में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है। सुजानपुर के बीड़ बगेहड़ा सीनियर सेकेंडरी स्कूल के वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री प्रो० प्रेम कुमार धूमल ने अपने संबोधन में यह बात कही। पूर्व मुख्यमंत्री ने सांसद भारत दर्शन योजना का जिक्र करते हुए कहा कि मेधावी विद्यार्थियों को भारत भ्रमण करवाने के लिए यह अनूठी योजना सांसद अनुराग ठाकुर द्वारा हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र के बच्चों के लिए शुरू की गई है। स्वयं देश के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने इस योजना को बहुत सराहा है।आज विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में सुविधाएं बढ़ी है, लेकिन पुराने समय में हाई स्कूल या सीनियर सेकेंडरी स्कूल जाने के लिए कई कई किलोमीटर पैदल जाना पड़ता था।
प्रो० धूमल ने कहा कि सुविधाओं के साथ प्रतिस्पर्धा भी बहुत बढ़ी है। आज विद्यार्थी परीक्षाओं में शत प्रतिशत अंक लेकर आते हैं। 90-91% अंक लेन वालों को कम समझ जाता है। लेकिन केवल किताबों का ज्ञान होना ही शिक्षा प्राप्त करने का ध्येय नहीं होना चाहिए। व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास सही मायनों में शिक्षा का उद्देश्य है। शिक्षित होना, संस्कारित होना, स्वस्थ होना इत्यादि इन सब लक्ष्यों को यदि हासिल करना है तो किताबी ज्ञान के साथ खेलों और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों में भी बच्चों को भाग लेना जरूरी है। प्रतिस्पर्धा भी तभी होगी जब बच्चा स्वस्थ होगा। और साथ में नशों से बच के रहना रहना भी अति आवश्यक हो गया है। आज एक साजिश रची जा रही है है कि कैसे भारत की युवा पीढ़ी को नशे में डुबोकर बर्बाद कर दिया जाए, फिर यदि युवा पीढ़ी बर्बाद होगी तो देश तो तो स्वतः ही बर्बाद हो जाएगा। इसका एक स्पष्ट प्रमाण अभी हाल ही में मुम्बई में देखने को मिला जहां लगभग एक हजार करोड़ के ड्रग्स पकड़े गए। कुछ सौदागर लोग चन्द पैसों के लालच में यह नशा देश की युवा पीढ़ी को बांटकर भारत के भविष्य को दांव पर लगा रहे हैं । इस नशे रूपी दानव से बचने की, सचेत रहने की जरूरत है। साथ में नशा फैलाने, नशा बांटने व नशा बढ़ाने जैसी गतिविधियां करने वाले लोगों का समाज में सामूहिक बहिष्कार करने की जरूरत है।
प्रो० धूमल ने अभिभावकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि यदि हमें अपने बच्चों को नशे से बचाना है तो हमें यह आदत छोड़ने पड़ेगी पड़ेगी कि हम ने बच्चे बच्चे को स्कूल भेज दिया अब अध्यापकों की जिम्मेदारी है। बच्चे की गतिविधियों पर नजर रखना बहुत जरूरी है। बच्चे स्कूल से कब आता जाता है, कहीं अकेला रहना पसंद तो नहीं करता,उसकी दोस्ती कैसे बच्चों के साथ है, बच्चा उदास तो नहीं रहता। नशे को रोकने के सामाजिक दायित्व निभाने को भी हम सबको आगे आना चाहिए। आज कई बार देखने में आता है कि बच्चों को नशा करते देख हम यह सोच कर आगे बढ़ जाते हैं कि यह किसी और का बच्चा है। वास्तव में अपने सामाजिक दायित्व के प्रति इस तरह की सोच ही बुराई को हावी होने देती है। आज लोग अपनी बहू बेटी से छेड़खानी होते देख लड़ाई झगड़ा भी कर लेते हैं लेकिन अगर वही बहु बेटी किसी और कि हो तो गवाही देने से बचने के लिए मुँह मोड़ लेते है। फिर समाज विरोधी तत्वों के हौंसले बढ़ जाते हैं। इसलिए बुराई को जड़ से खत्म करने के लिए सब अपना समाजिक दायित्व निभाने में लापरवाही न बरतें।
इस अवसर पर स्कूल के प्राध्यापक सुरेश शर्मा , रणजीत सिंह, पवन शर्मा, वीरेंद्र ठाकुर, अंजना चौहान, सुखदेव ठाकुर, प्यार चन्द, स्थानीय पंचायत प्रधान रजनी बाला, बलदेव राणा सहित स्कूल प्रबंधन, अध्यापक, स्कूली बच्चे, अभिभावक और स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

