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घुमारवीं के निर्धन परिवार की नौ वर्षीया मासूम आंखों की रोशनी से वंचित

Byjanadmin

Jan 13, 2019

प्रियंका की सहायता करने के लिए डंगार स्थित हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक शाखा डंगार में प्रियंका के पिता पवन कुमार के खाता संख्या नंबर 10810102696 में इच्छानुसार मदद कर सकते हैं।
संपादक

पीजीआई में चल रहा है बच्ची का इलाज

असहाय परिवार को मेजर आपरेशन के लिए एक लाख रूपए की सख्त जरूरत

जनवक्ता डेस्क बिलासपुर
कहावत है कि विपत्तियां कभी अकेले नहीं आती, और यदि आती भी हैं तो ऐसे लोगों पर जो पहले से ही वक्त की मार झेल रहे होते हैं। लेकिन उम्मीद पर दुनिया कायम हैं, जो दर्द देता है दवा का प्रबंध भी वही करता है। ऐसे में माध्यम बनने वाले हम आप जैसे सैंकड़ों किसी के दर्द के हमराही बनने के लिए इस कलियुग में भी खड़े हो जाते हैं, और हो भी क्यों न, मानवता मुसीबत के समय एक दूसरे की सहायता करना तो सिखाती है। उपमंडल घुमारवीं के एक निर्धन परिवार की नौ वर्षीया मासूम की दोनो आंखों की रोशनी चली गई है जबकि अस्पतालों के चक्कर काटे तो पता चला कि यह सब ब्रेन टयूमर के कारण हुआ है। पीजीआई में बच्ची का इलाज चल रहा है, अपनी जमा पूंजी और इधर उधर से उधार लेकर एक आपरेशन तो करवा लिया लेकिन मेजर आपरेशन के लिए एक लाख रूपए की इस असहाय परिवार को सख्त जरूरत है। बाप मिस्त्री का काम कर जैसे कैसे घर की नैया चला रहा था कि अचानक से इतने बड़े सदमे ने उसे हिला कर रख दिया है। डंगार के साथ लगते हरितल्यांगर के रहने वाले पवन कुमार की नौ वर्षीय बेटी प्रियंका जो कि राजकीय उच्च पाठशाला में तीसरी कक्षा में पढ़ रही, की आंखों की रोशनी चली गई है, लेकिन पीजीआई के चिकित्सक बच्ची की आंखों की रोशनी के साथ-साथ उसके जीवन को बचाने के लिए भरपूर प्रयास कर रहे हैं। लेकिन धन की कमी आड़े आ रही है। हालांकि सरकार की आयुष्मान योजना का भी इस बच्ची को लाभ मिल रहा है लेकिन कम से कम एक लाख रूपए की अभी सख्त और त्वरित जरूरत है। वहीं इस बच्ची की मदद के लिए संस्थाओं ने हाथ बढ़ाना शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी के तहत मानव सेवा ट्रस्ट सुंदरनगर के संस्थापक सदस्य प्रकाश बंसल ने बताया कि संस्था की ओर से इस परिवार को 11 हजार रूपए की मदद की गई है। उन्होंने कहा कि संस्था के सभी सदस्य अपने अपने स्तर पर और धनराशि एकत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं। बंसल ने कहा कि यदि मानवता का परिचय देते हुए सभी लोग आगे आकर इस बच्ची के इलाज के लिए सहयोग करें तो एक मासूम की जिंदगी बचाई जा सकती है। यही नहीं यदि सभी के सहयोग के साथ दुआओं ने असर दिखाया तो प्रियंका की आंखों की रोशनी दोबारा लौट सकती है।

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