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जनवक्ता डेस्क, बिलासपुर
यद्यपि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने 23 मार्च ,2007 को बडोल धार और संलग्न क्षेत्रों की कोई 25 पंचायतों को सीधे रूप से बिलासपुर जिला मुख्यालय से जोड़ने के लिए चाँदपुर – तलवाड़ से बैरी दाड़ोला पुल निर्माण का बजट में प्रावधान करके समारोह पूर्वक बड़ी धूम –धाम शिलान्यास कर दिया था, किन्तु फिर उसके बाद यह पुल केवलमात्र शिलान्यास तक ही सीमित होकर रह गया | बाद में प्रदेश में आई भाजपा सरकार ने भी इस पुल निर्माण के नाम पर जनता की भारी मांग के बावजूद भी एक ईंट तक नहीं लगाई | अब इस मामले को इतना उलझा दिया है कि 12 वर्ष बीत जाने पर भी लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप इस पुल के निर्माण की कोई आशा दूर दूर तक नजर नहीं आ रही है | अब औहर क्षेत्र के ग्रामीण भी राजाओं के जमाने के सतलुज नदी पर बने और जलमग्न हुए भंजवानी पुल निर्माण की मांग भी ज़ोरशोर से उठाने लगे हैं |
इस पुल के सारे घटना क्रम पर नजर रखने वाले प्रयवेक्षक कहते हैं कि पूर्व भाजपा सरकार के समय बड़े नेताओं ने यहाँ तक कह दिया था कि जितनी राशि में इस पुल का निर्माण होगा , उतनी राशि से तो ऐसे अन्य तीन पुल डाले जा सकते हैं | इसलिए इस बैरी दड़ोला पुल का बनाया जाना भाजपा की दृष्टि में उचित नहीं माना जा रहा है | क्षेत्र के लोगों का कहना है कि इस पुल निर्माण के नाम पर ही पिछले विधान सभा चुनाव में भाजपा ने जनता से इसे बनाने का वादा करके वोट लेकर सत्ता प्राप्त की है और अब इसके नेता निर्माण की बात तक नहीं कर रहे हैं | यही कारण है कि अब लोगों में सरकार और स्थानीय भाजपा नेताओं के विरुद्ध भारी रोष व आक्रोश पैदा होता जा रहा है |
पुष्ट सूचनाओं के अनुसार वीरभद्र सिंह सरकार ने बिना सोचे –विचारे आनन -फानन में केवल मात्र 2007 के विधान सभा चुनाव लोगों के वोट प्राप्त करने के लिए ,बिलासपुर की जनता की मांग के बावजूद ,इसे बिलासपुर नगर के साथ खैरिया से जोड़ने की बजाए कोई 5-6 किलोमीटर दूर तलवाड़ से जोड़ने का रातों –रात कार्यक्रम बना कर जबरदस्ती शिलान्यास कर दिया था | हालांकि तलवाड़ गाँव के लोग किसी भी कीमत पर इस पुल के लिए बनाए जाने वाली संपर्क सड़क के लिए भूमि देने को तैयार नहीं हैं और न ही उनमें इस पुल को लेकर कोई उत्साह ही है |
पुल निर्माण के विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसा कौन सा पुल है जिसे बनाया नहीं जा सकता है ? किन्तु इस बैरी दाड़ोला पुल निर्माण की इच्छा शक्ति तो सत्ताधारी नेत्रत्व में होनी चाहिए | यदि सरकार लोक निर्माण विभाग को इसके निर्माण के आदेश दे तो कोई कारण नहीं कि इस पुल को इसके वास्तविक उपयोग वाले स्थान खैरिया से सीधे बैरी दाड़ोला को न जोड़ा जा सके | लोगों की मांग है कि इस पुल निर्माण को शीघ्र आरंभ करने के आदेश दिये जाएँ अन्यथा संसदीय चुनावों सहित अगले विधान सभा चुनाव में सत्ताधारी नेताओं को लोगों के प्रबल गुस्से व भारी विरोध का सामना करना पड़ेगा |
