
जनवक्ता डेस्क, बिलासपुर
शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि केंद्र सरकार आने वाले समय में नई शिक्षा नीति ला रही है। इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के पद की शपथ लेने के बाद अपनी अध्यक्षता में हुई पहली बैठक में ही इसको लेकर केंद्र सरकार की मंशा जाहिर कर दी है। शिक्षा मंत्री ने यह बात आज सोलन के संस्कृत महाविद्यालय में आयोजित मेधावी विद्यार्थी सम्मान समारोह के मौके पर आयोजित पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करते हुए अपने संबोधन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि शिक्षा के मायने तभी सार्थक हो सकते हैं जब उसमें संस्कार भी शामिल हों । शिक्षा मंत्री ने युवा वर्ग में नशे के बढ़ते रुझान पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस दिशा में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह दायित्व केवल शिक्षकों का ही नहीं अपितु परिवार, समाज और प्रशासन का भी है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक का महत्व आज के परिपेक्ष में भी उतना ही प्रासंगिक है जितना कि भारत में प्राचीन काल हमें रहा है। इसी वजह से भारत को विश्व गुरु होने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ । भारत में ही नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय मौजूद रहे। उन्होंने कहा की हिमाचल प्रदेश का शिक्षा के क्षेत्र में पूरे भारत में अग्रणी स्थान है। केरल राज्य के बाद हिमाचल प्रदेश की साक्षरता दर आती है। सुरेश भारद्वाज ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में आज कड़ी प्रतिस्पर्धा का दौर चल रहा है। परीक्षा में विद्यार्थी 90 फ़ीसदी से भी अधिक अंक अर्जित कर रहे हैं। लेकिन इसके साथ-साथ विद्यार्थियों में लर्निंग आउटकम भी बेहतर होना चाहिए । इससे पूर्व शिक्षा मंत्री ने दीप प्रज्वलित करके समारोह का शुभारंभ किया। आयोजकों द्वारा शिक्षा मंत्री को स्मृति चिन्ह भेंट करके सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री महेंद्र नाथ सूरत ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर योगेंद्र मखैक उप निदेशक उच्च शिक्षा, श्रवण कुमार चौधरी उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा, राजेश कश्यप वरिष्ठ भाजपा नेता, रविंद्र परिहार मंडल अध्यक्ष, दिव्या ठाकुर प्रधानाचार्य राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला दाड़ो देवरिया, मदन हिमाचली, प्रबंध निदेशक गुरु द्रोणाचार्य अकैडमी चंडीगढ़, चंद्रमोहन ठाकुर उप जिला शिक्षा अधिकारी, जिले के विभिन्न राजकीय और निजी शिक्षण संस्थानों के मेधावी विद्यार्थी और अध्यापक भी मौजूद रहे।
