शांति व आनंद देती हैं श्री राम के चरित्र की उच्च वृतियां : राज्यपाल
जनवक्ता डेस्क, बिलासपुर
राजभवन शिमला में आयोजित साप्ताहिक श्री रामचरित चिंतन सत्र के अंतिम दिन समापन अवसर पर राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम से श्रेष्ठ कोई देव नहीं, उनसे उत्तम कोई व्रत नहीं, कोई श्रेष्ठ योग नहीं और कोई उत्कृष्ट अनुष्ठान नहीं है। श्री राम के महान चरित्र की उच्च वृतियां जनमानस को शांति और आनंद उपलब्ध कराती हैं। आचार्य देवव्रत ने कहा कि श्री राम ने विषम परिस्थितियों में भी नीति सम्मत रहे। उन्होंने वेदों और मर्यादा का पालन करते हुए खुशहाल राज्य की स्थापना की। स्वयं की भावना व सुखों से समझौता कर न्याय और सत्य का साथ दिया। आदर्श भाई, पति और आदर्श बेटा, मित्र, न्यायप्रिय राजा इत्यादि गुणों के कारण उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम बनाते हैं। राज्यपाल ने श्री रामचरित चिंतन सत्र प्रस्तुत कर रहे कुलदीप आर्य और उनकी मंडली का आभार व्यक्त किया। उन्होंने हर सत्र में आये मुख्यातिथियों का भी आभार व्यक्त किया। इससे पूर्व, राज्यपाल ने श्री रामचरित चिंतन प्रस्तुत कर रहे कुलदीप आर्य और उनकी मंडली को शॉल भेंट कर सम्मानित किया। श्री रामचरित चिंतन सत्र के समापन समारोह में अतिरिक्त मुख्य सचिव आर. डी. धीमान बतौर मुख्यातिथि उपस्थित हुए। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी भी इस अवसर पर उपस्थित थे। श्री रामचरित चिंतन प्रस्तुत करते हुए कुलदीप आर्य ने भरत के श्री राम के प्रति श्रद्धा का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया में धन,संपत्ति और वैभव को कोई भी व्यक्ति पुरुषार्थ से पा सकता है लेकिन भाई की शक्ति व स्नेह मुश्किल से मिलता है। भरत मिलाप के सुंदर वृतांत ने सभी को भावुक कर दिया। रावण वध और श्री राम की अयोध्या वापसी का सम्पूर्ण चित्रण संगीतमय चिंतन द्वारा कुलदीप आर्य ने प्रस्तुत किया। लेडी गवर्नर श्रीमती दर्शना देवी, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संदीप शर्मा, पुलिस महानिदेशक सीता राम मरडी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

