सारा जीवन समाजसेवा और जनहित को किया समर्पित
नेताओं और शक्तिशाली लोगों के प्रलोभनों और झांसों को पूरी तरह से नकारा
जनवक्ता डेस्क, बिलासपुर
पत्रकारिता के क्षेत्र में भीष्म पितामह के नाम से प्रसिद्ध बिलासपुर की शान पंडित जयकुमार एक ऐसा नाम हैं जिसे कई पीढ़ियों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते देखा गया है। इस समय 84 वर्षीय जयकुमार ने स्कूल स्तर पर उस समय अध्यापक हरियाणा से संबन्धित हिन्दी और संस्कृत के विद्वान प्रोफेसर बी सी जैन के मार्ग दर्शन में छठी कक्षा से पत्रकारिता का सफर आरंभ किया था ,जब उन्होने उनकी प्रतिभा को भाँप कर उन्हें उस समय के लोक प्रिय समाचार पत्र “ हिन्दी मिलाप “ में संपादक के नाम पत्र लिखने के लिए प्रेरित किया । इसके बाद पत्रकारिता के प्रति जयकुमार का रुझान व झुकाव इस कदर बढ़ा कि उन्होने कभी भी पीछे मुड़ कर नहीं देखा और जीवन के विभिन्न स्तरों पर अन्य व्यवसायों के कितने ही लुभावने व आकर्षक तथा पद –प्रतिष्ठा को भी त्याग कर केवलमात्र पत्रकारिता के माध्यम से समाज सेवा और जनहित को प्राथमिकता दी और इसे अपने जीवन का आदर्श बना लिया । जयकुमार ने 1950 के दशक में इसके बाद तब एक लोक प्रिय दैनिक समाचार पत्र “ वीर प्रताप “ और बाद में एक संवाददाता के रूप में ही “ पंजाब केसरी “ के लिए कार्य करना आरंभ किया और फिर हिन्दी “ दैनिक ट्रिब्यून “का प्रकाशन आरंभ होने पर इसके भी दो दशकों से अधिक तक वे संवाददाता रहे जबकि उन्होने “ वीर प्रताप “ में 40 वर्ष और “ पंजाब केसरी “ में 45 वर्ष तक तथा “ दैनिक ट्रिब्यून “ में 30 वर्ष तक साथ – साथ एक संवाददाता के रूप में कार्य किया । अपने कालेज के शुरू के दिनों में तब बिलासपुर नगर से भाखड़ा बांध के कारण बनने वाले गोबिन्द सागर के परिणाम स्वरूप उजड़ने वाले बिलासपुर के विस्थापितों की उस समय 60 के दशक में कठिनाइयों व समस्याओं को उन्होने अंग्रेजी दैनिक “ द ट्रिब्यून “ के माध्यम से “ लेटर –टू- एडिटर “ (संपादक के नाम पत्र ) लिख कर न केवल विस्थापितों की आवाज को ही बुलंद किया बल्कि सरकार को उनकी कठिनाइयों और समस्याओं को सुलझाने के लिए विवश कर दिया ,जिस से प्रभावित होकर तब अंग्रेजी दैनिक “ द ट्रिब्यून “ के मुख्य समपादक आर माधवन नायर ने उन्हें अंग्रेजी ट्रिब्यून का संवाददाता बनने के लिए आमंत्रित किया , जिस दायित्व को निरंतर 50 वर्ष तक निभाने के बाद वे अब कुछ समय पूर्व ही वहाँ से सेवा निवृत हुए हैं और आज कल वे एक दैनिक समाचार पत्र के लिए संवाददाता के रूप में कार्य कर रहे हैं । जयकुमार ने आयु पर्यंत पत्रकारिता को एक मिशन के रूप में लेकर इसे समाज सेवा अथवा जनसेवा का ही माध्यम माना ,जिस कारण उन्हें बार बार शक्तिशाली संस्थाओं ,सरकारों और प्रभावशाली व्यक्तियों से भी चुनौतियाँ मिली। किन्तु उन्होने पत्रकारिता की निष्पक्षता –निर्भीकता और सत्यता के मानदंडों से कभी भी किसी भी कीमत पर सम्झौता नहीं किया । जिसके परिणाम स्वरूप ही न केवल उन्हें सरकार व मुख्यमंत्री तथा मंत्रियों तक से हिमाचल उच्च न्यायालय तक मान हानि के केसों का सफलता पूर्वक सामना करना पड़ा बल्कि पत्रकारिता के उन्हीं मानदंडों का पालन करने के लिए ही उन्हें 1975 में घोषित आपातकाल में पूरे 19 मास तक धर्मशाला जेल में भी बंद रहना पड़ा ।पत्रकारिता के लिए सारे देश भर में किसी पत्रकार का पूरे आपातकाल में पूरे 19 मास तक जेल प्रवास का जयकुमार का भारत भर में एक मात्र उदाहरण था। जेल में उन्हें ” सरकार से सहयोग ” करने की कागज पर लिखी एक पंक्ति पर हस्ताक्षर कर दिये जाने पर उन्हें जेल से मुक्त कर दिये जाने के उच्चाधिकारियों के बार बार के प्रलोभन भी उन्हें पत्रकारिता के सिद्धांतों और मानदंडों से उन्हें डिगा नहीं सके और आपात काल के प्रथम दिन से लेकर इसकी समाप्ति तक उन्हें जेल की यातनाएं झेलनी पड़ी । जयकुमार पत्रकारिता को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्चाधिकार प्राप्त दाईत्व मानते हैं और इसी उदेश्य की पूर्ति के लिए उन्होने वर्ष 1969 में राज्य पत्रकार महासंघ की नींव रखी और सारे हिमाचल भर के पत्रकारों को एक सूत्र में बांध कर उन्हे एक संगठित मंच उपलब्ध करवा कर उनकी विभिन्न कठिनाइयों को सुलझाने का प्रयास किया जबकि वे इस महासंघ की स्थापना से लेकर अभी तक इसके निरंतर राज्य प्रधान चले आ रहे हैं । अपनी पत्रकारिता और साहित्य की व्यस्तताओं के बावजूद भी वे कुछ अन्य सामाजिक दाईत्वों को निभाने के उदेश्य से व्यस्त रहते हैं जबकि भाखड़ा विस्थापितों के विस्थापन से लेकर अब तक सर्वदलीय भाखड़ा विस्थापित समिति के महामंत्री चले आ रहे हैं । उन्होने सारे प्रदेश भर के दूकानदारों , छोटे ब्यापारियों की दैनिक कठिनाइयों को भाँपते हुए उन्हें भी राज्य ब्यापार मण्डल के रूप में सशक्त माध्यम उपलब्ध करवाने व इस संस्था का गठन करने में भी अग्रणी भूमिका निभाई है जिसके भी वे अभी कुछ समय पहले तक राज्य महामंत्री के पद पर विराजमान रहे ।

