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हिमाचल सरकार ने अगर नीति न बदली मजबूरन बंद करने पड़ेंगे बार : रमेश कुमार राणा

Byjanadmin

Jun 22, 2019

बढ़े हुए शराब लाइसेंस शुल्क, कोटा और पेनेल्टी को पूरी तरह से हटाने के लिए एसोसिएशन कर रही गुहार

प्रदेश में कुल 630 बार संचालक इसी माध्यम से आजीविका कमा रहे

सरकार की दमनकारी नीतियों के कारण 12 बार हो चुके हैं बंद

उत्पाद एवं कराधान नीति 2019-20 की समीक्षा की जाए

राज्य में बार और रेस्टोरेंट-होटलों में शराब की सेवा और बिक्री के लिए निर्धारित लाइसेंस शुल्क में पिछले 6 वर्षों से लगभग 700 प्रतिशत की वृद्धि


जनवक्ता डेस्क, बिलासपुर

हिमाचल प्रदेश बार एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के महासचिव रमेश कुमार राणा ने कहा कि यदि सरकार ने अपनी नीतियों में बदलाव न किया गया तो बार मालिकों को मजबूरन अपने बार बंद करने पड़ेंगे। वह बिलासपुर में प.कारों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस फैसले से सरकार के राजस्व पर भी फर्क पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बढ़े हुए शराब लाइसेंस शुल्क, कोटा और पेनेल्टी को पूरी तरह से हटाने के लिए एसोसिएशन लंबे समय से सरकार के समक्ष गिड़गिड़ा रही है। प्रदेश में कुल 630 बार संचालक इसी माध्यम से आजीविका कमा रहे हैं लेकिन सरकार की दमनकारी नीतियों के कारण 12 बार बंद हो चुके हैं। जबकि अन्य बंद होने की कगार पर है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से मिलने के बाद भी इस मसले पर सरकार गंभीर नही है। राणा ने कहा कि आबकारी एवं कराधान नीति 2019-20 के तहत रखे गए प्रावधानों की तुलना अन्य राज्यों से करना अनुचित है क्योंकि प्रदेश के के अधिकांश भागों में जनसंख्या के सामान्य लाभों के अनुसार प्रावधान किया जाए और अन्य राज्यों से कोई अनुचित उदाहरण न लिया जाए क्योंकि प्रत्येक राज्य की अपनी भौगोलिक और जन सांख्यिकीय स्थापना के अनुसार नियमों का अपना सेट है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया ह कि उत्पाद एवं कराधान नीति 2019-20 की समीक्षा की जाए और इसे बड़े पैमाने पर राज्य के लाभों में संशोधित करें। उन्होंने बताया कि राज्य में बार और रेस्टोरेंट-होटलों में शराब की सेवा और बिक्री के लिए निर्धारित लाइसेंस शुल्क में पिछले 6 वर्षों से लगभग 700 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013-14 में बारों के लिए शुल्क 55,000 रुपये था, 2014-15 में 64,000 रूपए, वर्ष 2015-16 में 1,25,000, 2016-17 में 1,50,000 रुपये, 2017-18 में दो लाख रुपये, वर्ष 2018-19 में 2,50,000 रुपये और वर्ष 2019-20 के लिए 3,75,000 रूपए एल-4 और एल-5, हिमाचल बार के लिए 2,50,000 रुपये इस में जोड़ें। वहां अब एक 10 प्रतिशत अग्रिम सुरक्षा जमा, 15 अप्रैल-2019 तक देय है। पूरे वर्ष के लिए शुल्क प्राप्त करने के बावजूद दो महीने पहले से। कमरों की सं या के आधार पर होटल में बार्स की शुल्क भी इसी अनुपात में बढ़ा दी गई थी। रमेश कुमार राणा ने बताया कि शराब की बिक्री के संबंध में उत्पाद एवं कराधान नीति के अंतर्गत न्यूनतम भारोत्तोलन को निर्धारित करने का प्रावधान किया गया था। बार्स के लिए न्यूनतम गारंटीकृत कोटा रेस्टोरेंट के लिए 148 मामले और होटलों के लिए 10 से 30 कमरों के साथ उठाया जाना था, उन्होंने बताया कि इसमें वर्ष 2013-14 में 72 मामले थे। लगभग सभी हिमाचल बार इसके बावजूद वर्ष 2014-15 में बार, होटलों के लिए न्यूनतम गारंटी व गारंटी कोटा को क्रमश 1500,750 प्रूफ लीटर(222 मामले) तक बढ़ा दिया गया था और अब यह 2019-20 में 2500, 1500 प्रूूफ लीटर (375 मामले) है। उन्होंने कहा कि कोटा का जबरन निर्धारण उचित उदेश्य की भावना के विरुद्ध है क्योंकि बार, होटल आम जनता को उनसे शराब खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि विभाग के नियमों और शर्तों के उल्लंघन पर एक लाख रूपए जुर्माना और दो दिन बार बंद और दूसरी बार उल्लंघना होने पर चार दिन बंद है और दो लाख जुर्माना लगाया जाना तर्कसंगत नहंी है। यहीं नहीं चौथी बार लाइसेंस रद्द भी हो सकता है। ऐसे फरमानों से किस तरह से बार , होटल रेस्टोंरेंट मालिक सरवाइव करेंगे। उन्होंने सरकार से मांग की है कि 30 जून को समाप्त होने वाली पहली तिमाही से पहले नीति में संशोधन करें ताकि इस वर्ग को राहत मिल सके। राणा ने कहा कि यदि सरकार उन्हें कोआपरेट नही करती है तो सभी बार संचालक अपने लाइसेंस सरकार को वापिस कर देंगे। जिससे एक बार फिर बेरोजगारी पनपेगी और सरकार के राजस्व में भी घाटा होगा। पत्रकारवार्ता में आजमखान, प्रवीण कुमार और जिले के अन्य बार संचालक भी मौजूद थे।

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