देहरादून,। एनआईईपीवीडी, देहरादून में दृष्टि दिव्यांग पेंशनरों और कर्मचारियों की अचानक चिकित्सा सुविधा व पेंशन बंद किये जाने पर दृष्टि दिव्यांग पेंशनरों और कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। एनआईईपीवीडी, देहरादून भारत सरकार का एक प्रमुख संस्थान है। राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (एनआईईपीवीडी) स्वतंत्रता से पूर्व 1943 से दृष्टि दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए सक्रिय रूप से कार्यरत है, में हाल ही में गत 20 जून 2025 को भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दृष्टि दिव्यांग बच्चों के साथ अपना जन्म दिवस मना कर ऐतिहासिक गौरव प्रदान किया।
वर्तमान में इसी संस्थान के सभी सेवानिवृत्त पेंशनभोगियों, कार्यरत सरकारी कर्मचारियों तथा उनके आश्रितों की चिकित्सा सुविधा को बिना किसी पूर्व आदेश के तत्काल प्रभाव से पूर्ण रूप से बंद कर दिया गया है। यह निर्णय भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से लेकर सभी दिव्यांग साथियों तथा स्टाफ के साथ घोर अन्याय किया गया।
इस निर्णय से अनेक दृष्टि दिव्यांग पेंशनर, सरकारी कर्मचारी और उनके आश्रित, जिनका गंभीर बीमारियों जैसे-कैंसर, हृदय रोग, टी.बी., डायबिटीज़ आदि का उपचार चल रहा है, गहन संकट में हैं। कई दृष्टि दिव्यांगजन, जिन्होंने 30-40 वर्षों तक सेवा दी है, अब इलाज के लिए मोहताज हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय अब सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन भी पूर्ण रूप से बंद करने की तैयारी में हैं, जबकि ये सभी कर्मचारी पेंशन के वैधानिक हक़दार हैं। कई बार पेंशन बंद करने के आदेश भी पहले जारी किए जा चुके हैं। जिससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों में काफी रोष नजर आ रहा है। इस गंभीर परिस्थिति के विरोध में सभी सेवानिवृत्त पेंशनभोगियों (दृष्टि दिव्यांग पेंशनर), विभिन्न प्रकार के पेंशनरों तथा कार्यरत कर्मचारियों की एक आपात बैठक आयोजित कर प्रबंधन के इस निर्णय की घोर निंदा की गयी। बैठक का संचालन करते हुए सेवानिवृत्त अधिकारी जगदीश चंद्र लखेड़ा जी ने विस्तृत रूप से जानकारी देते हुए सभी को साथ देने की अपेक्षा की।
बैठक में एनआईवीएच संघ के अध्यक्ष जगदीश चंद्र कुकरेती तथा उपाध्यक्ष एस. सी. बिंजोला, डॉ. जे पी ऐन मिश्रा, बी डी शर्मा, योगेश अग्रवाल, पवन शर्मा, हरीश पंवार आदि अनेक सेवानिवृत्त अधिकारीयों व कर्मचारियों ने सम्बोधित करते हुए एनआईईपीवीडी, देहरादून प्रबंधन की घोर निंदा की तथा अविलंभ चिकित्सा सुविधा यथावत जारी करने का प्रस्ताव पारित करवाया। सभी ने एक मत से कहा यह लड़ाई लम्बी है जिसके लिए हम सभी एक जुट होकर संस्थान में हड़ताल, धरना प्रदर्शन के साथ-साथ माननीय सक्षम न्यायालय तक विधिक लड़ाई लड़ कर दृष्टि दिव्यांग पेंशनरों और सेवानिवृत अधिकारीयों व कर्मचारियों को उनके हक़ दिलवाएंगे। सभी ने करतल ध्वनि के साथ एकजुटता का परिचय दिया।
दृष्टि दिव्यांग पेंशनरों और कर्मचारियों की पेंशन रोकने पर की निंदा