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शिक्षा के साथ बच्चों को अच्छे गुण और संस्कार सिखाना भी बहुत जरूरी: धूमल

Byjanadmin

Dec 26, 2018

पूर्व मुख्यमंत्री ने कक्कड़यार सीनियर सेकेण्डरी स्कूल के वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह में नवाजे होनहार

जनवक्ता ब्यूरो हमीरपुर
शिक्षा के साथ साथ बच्चों को अच्छे गुण और संस्कार सिखाना भी बहुत जरूरी हैं। टौणीदेवी के कक्कड़यार सीनियर सेकेण्डरी स्कूल के वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह में बतौर मुख्यतिथि पूर्व मुख्यमंत्री प्रो० प्रेम कुमार धूमल ने उपस्थित बच्चों व अन्य लोगों को सम्बोधित करते हुए यह बात कही। प्रो० धूमल ने कहा कि हमारी जिन परम्पराओं व मान्यताओं को दकियानूसी व रूढ़िवादिता का प्ररूप करार देकर दुनिया के अन्य देश हमें चिढ़ाते थे, आज वही देश उन परम्पराओं के पीछे छिपे वैज्ञानिक सिद्धांतों को पहचान कर उन्हें अपना रहे हैं।
प्रो० धूमल ने कहा कि विद्यार्थी,अध्यापक एवं अभिभावक के जीवन में वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह का बहुत महत्व होता है। 1998 में जब हमारी सरकार बनी तब उसमें स्वर्गीय श्री ईश्वर दास धीमान जी शिक्षा मंत्री बने थे जो स्वयं भी एक अध्यापक और उन्हें इस महत्व का पूर्ण ज्ञान था। उन्होंने हर वर्ष हर शिक्षण संस्थान में वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह मनाया जाना सुनिश्चित किया था।
प्रो० धूमल ने शिक्षा के लक्ष्य पर सबका ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि बच्चे के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास वास्तव में शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए। डिग्री लेकर नौकरी के काबिल बनना नहीं।
विद्यार्थी जीवन में पढ़ाई के साथ खेलों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल का मैदान बच्चों को अनुशासन, टीम स्पीरिट, प्रतिस्पर्धा की भावना, मिलकर सबका सहयोग करना और केवल अपना स्वार्थ न देखना, सिखाता है। खेलों से यह सब गुण तो बच्चे में आते ही हैं, साथ ही उसका शरीर भी स्वस्थ रहता है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि गीता का ज्ञान अर्जुन जैसे पराक्रमी योद्धा को दिया गया था। जो स्वस्थ ही नहीं होगा वह ज्ञान प्राप्त कर करेगा क्या। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जितना जरूरी खेलें हैं उतना ही जरूरी है नशों से बच के रहना। स्वास्थ्य क्या नशे की लत अगर पड़ जाए तो जीवन भी खत्म हो जाता है।
प्रो० धूमल ने कहा कि शिक्षा और गुणों के साथ बच्चों में संस्कार होना भी जरूरी हैं। हमें बचपन से सिखाया जाता है कि बड़ों का आदर सम्मान करो। सबको सम्मान देना हमारे धर्म और संस्कृति की पहचान है। धर्म कोई पूजा पद्धति नहीं है। हमारा धर्म हमें जिम्मेवारी सिखाता है।
इस अवसर पर जिला परिषद अध्यक्ष राकेश ठाकुर, मंडल अध्यक्ष रंजीत सिंह, रसील सिंह मनकोटिया, स्कूली बच्चे,अभिभावक, अध्यापक, प्रबन्धन सहित स्थानीय पंचायत प्रधान शकुंतला देवी, पंचायत प्रतिनिधि व अन्य लोग उपस्थित रहे।

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